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एक बार फिर कदौरा ब्लॉक सुर्खियों में! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा मनरेगा का सबसे बड़ा खेल? रिकॉर्ड में सैकड़ों मजदूर, जमीन पर सन्नाटा!


एक बार फिर कदौरा ब्लॉक सुर्खियों में!
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा मनरेगा का सबसे बड़ा खेल?
रिकॉर्ड में सैकड़ों मजदूर, जमीन पर सन्नाटा!

कदौरा विकासखंड एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है।
कई बार जांच, नोटिस और जवाब-तलब के बाद भी हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते नजर आ रहे हैं।

हमारी खोजी पड़ताल में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने मनरेगा कार्यों की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

कई दिनों तक ऑनलाइन रिकॉर्ड की गहन जांच और फिर उन्हीं कार्यस्थलों पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखने के बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
सरकारी पोर्टल पर सैकड़ों मजदूरों की हाजिरी, मानव दिवस और कार्य प्रगति दर्ज दिखाई गई, लेकिन मौके पर न तो मजदूर मिले और न ही वैसा कार्य होता दिखाई दिया, जैसा कागजों में दर्शाया गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मौके पर मजदूर ही नहीं थे, तो आखिर किसके नाम पर हाजिरी लग रही है?
सरकारी धन किसके खाते में पहुंच रहा है?
क्या मास्टर रोल सिर्फ कागजों तक सीमित है?
क्या जॉब कार्डों का दुरुपयोग कर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है?

जब संबंधित जिम्मेदारों से सवाल पूछा गया तो जवाब मिला कि निरीक्षण किया गया था और मजदूरों के साथ फोटो भी ली गई थी।
लेकिन हमारी टीम जब मौके पर पहुंची तो वहां का नजारा कुछ और ही कहानी बयां कर रहा था।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सच क्या है?
क्या रिकॉर्ड कुछ और कह रहे हैं और जमीनी हकीकत कुछ और?

हमारी टीम ने सिर्फ एक स्थान ही नहीं, बल्कि कई रिकॉर्ड खंगाले हैं।
शुरुआती जांच में ऐसे कई बिंदु सामने आए हैं जो बड़े स्तर पर अनियमितताओं की आशंका पैदा करते हैं।
यदि इन तथ्यों की निष्पक्ष जांच होती है तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।

सबसे हैरानी की बात यह है कि कदौरा ब्लॉक पहले भी कई बार विवादों और शिकायतों को लेकर सुर्खियों में रहा है। ।

कई अधिकारियों को नोटिस जारी हुए, जवाब मांगे गए, जांच बैठी, लेकिन कार्रवाई आखिर नोटिसों से आगे क्यों नहीं बढ़ी?

क्या भ्रष्टाचार पर सिर्फ कागजी कार्रवाई होती है?

क्या जिम्मेदारों को किसी का संरक्षण प्राप्त है?
यह सवाल अब आम जनता भी पूछ रही है।

*यह तो सिर्फ पहला एपिसोड है…*

बहुत जल्द हमारी खोजी पड़ताल के अगले एपिसोड में होगा बड़ा खुलासा—

एक ही फोटो कितनी जगह इस्तेमाल होने का दावा?

अलग-अलग नामों पर कैसे चल रहा कथित खेल?

फर्जी मास्टर रोल और जॉब कार्ड का पूरा नेटवर्क।

किसे मिले नोटिस और क्यों दब गई कार्रवाई?

आखिर किसके संरक्षण में चल रहा यह कथित खेल?

दस्तावेज, ग्राउंड रिपोर्ट और चौंकाने वाले सबूत।

यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ अनियमितता नहीं बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।

यह सिर्फ शुरुआत है… अभी कई बड़े खुलासे बाकी हैं।

सच छिपेगा नहीं… हर परत खुलेगी, हर सवाल का जवाब मांगा जाएगा।

जिला ब्यूरोचीफ
वैभव राजावत
जनता का सच
उरई जालौन
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