
दिल्ली से आए निरंकारी संत ने चेताया
ब्रह्मबोध अब नहीं, तो फिर कब ?
मथुरा ब्यूरो चीफ।
ब्रह्मबोध के लिए किसी विशेष कर्म या किसी विशेष क्रिया या पदति की जरूरत नहीं है। चौरासी लाख योनियों में ब्रह्मबोध का अवसर सिर्फ़ मनुष्य योनी में ही सम्भव है। हे इंसानों ! परमात्मा को अब भी नहीं जाना तो फिर कब और किस योनी में जानोगे, यह अवसर फिर मिलने वाला नहीं।
यह जागरूक करने वाले विचार दिल्ली से आए निरंकारी संत श्री सुखदेव सिंह जी ( जनरल सेक्रेटरी स.नि.म.) ने व्यक्त किए। उनके आगमन पर यहां वृंदावन के अटल्ला चुंगी रोड स्थित एक सभागार (जीएंडजी पैलेस) तथा हाइवे नवादा स्थित संत निरंकारी भवन पर अलग अलग सत्संग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें उन्होंने जिज्ञासाओं को मनुष्य जन्म की सार्थकता बताई।
उन्होंने कहा कि परमात्मा हर समय हमारे अंग संग है, हमारे साथ है, जो खुद प्रलय के साथ मिटता नहीं, बदलता नहीं, न घटता न बढ़ता है, सदा एक एकरस रहता है, फिर हम क्यों समय के साथ बदल जाते हैं और भटकते रहते हैं। हम स्थिर परमात्मा के साथ जुड़कर स्थिर रह सकते हैं। जब जीवन में प्रभु आ जाते हैं तो जीवन आनंद भरा हो जाता है। जो सतगुरु की सीख पर यकीन करता है वह निरंतर सत्य के पथ पर अग्रसर रहता है, वह कभी डगमगाता नहीं है। भक्ति में संशय की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि ब्रह्म की प्राप्ति से ही, भम्र की समाप्ति होती है।
निरंकारी संत ने कहा कि परमात्मा जानने योग्य है, लेकिन प्रभु को साधारण आंखों से नहीं देख सकते, इसके लिए पूर्ण सतगुरु दिव्यचक्षु प्रदान करते हैं। परमात्मा के साक्षात्कार में क्षणिक भी देरी नहीं लगती सतगुरु की कृपा से पलभर में हम ब्रह्मानुभूति कर सकते हैं। वर्तमान में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज हर मानव को ब्रह्मबोध करा रहे हैं।
मथुरा के जोनल इंचार्ज संत श्री एच के अरोड़ा जी ने संत निरंकारी मिशन के आध्यात्मिक सिद्धांत बताते हुए कहा कि सत्गुरू से परमात्मा को जानकर ही भक्ति शुरू होती है। उन्होंने संत भक्तों का स्वागत कर सबका आभार भी जताया।


