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पूर्व मंत्री, राजस्थान सरकार — स्व. श्री भरत लाल मीणा जी: जननेता, कर्मयोगी और सादगी की मिसाल*~ लेखिका: अनुराधा मीणा (पुत्रवधू)


पूर्व मंत्री, राजस्थान सरकार — स्व. श्री भरत लाल मीणा जी: जननेता, कर्मयोगी और सादगी की मिसाल*~
लेखिका: अनुराधा मीणा (पुत्रवधू)
जनता का सच
स्टेट ब्युरो राधामोहन अग्रवाल
बामनवात स्वर्गीय श्री भरत लाल मीणा जी की तीसरी पुण्यतिथि है। इस अवसर पर उन्हें श्रद्धा से स्मरण करते हुए मन भावुक हो उठता है।
वे केवल हमारे परिवार के नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के एक ऐसे जननेता थे जिन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने को अपना संकल्प बनाया। राजस्थान सरकार में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री और बामनवास व गंगापुर सिटी के विधायक के रूप में उनका कार्यकाल इस क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी रहा। उनके प्रयासों से ही बावनवास क्षेत्र में पेयजल योजना की शुरुआत हो सकी। बावनवास पंचायत समिति की स्थापना के पीछे भी उनका ही योगदान था। मंत्री रहते हुए उन्होंने बावनवास और गंगापुर सिटी में “कृषि मंडी” की स्थापना करवाई, जिससे किसानों और व्यापारियों को स्थायी लाभ मिला।

इसके अलावा, गंगापुर सिटी में मीना समुदाय के कल्याण हेतु निर्मित “मीना धर्मशाला” के निर्माण में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस धर्मशाला की आधारशिला से लेकर निर्माण तक वे प्रमुख रूप से जुड़े रहे, ताकि समाज को एक सशक्त मंच और सुविधाजनक स्थान मिल सके। यह उनके समाज के प्रति समर्पण का एक जीवंत उदाहरण है, जो आज भी सभी के सामने खड़ा है।

उनके पास जयपुर जैसे महानगर में सुविधाओं से भरपूर जीवन जीने का विकल्प था, लेकिन उन्हें अपनी धरती और अपने लोगों से इतना प्रेम था कि उन्होंने शहर की चकाचौंध छोड़कर आमजन के बीच जीवन बिताना चुना।
वे विधायक रहते हुए भी सामान्य बस में सफ़र करते नजर आते थे, जिससे जनता से उनका जुड़ाव कभी नहीं टूटा। अपने सबसे व्यस्त दिनों में भी वे खेतों में हल चलाना या घरेलू काम करना नहीं छोड़ते थे। जीवन के अंतिम दिन तक उन्होंने अपने छोटे-से-छोटे कार्य खुद करने की परंपरा बनाए रखी। उनकी सादगी मुझे हमेशा मंत्रमुग्ध करती रही।मैंने व्यक्तिगत रूप से उनसे यह सीखा कि ऊँचे पद पर पहुँचकर भी सादगी, आत्मनिर्भरता और ज़मीनी जुड़ाव कैसे बनाए रखा जा सकता है।

वे हमेशा कहा करते थे: “नेता वही जो जनता के बीच रहे, और काम वही जो समाज को उठाए।” आज जब राजनीति को केवल पद और प्रचार का माध्यम माना जाने लगा है, ऐसे समय में उनके जैसे नेता की साधना, सादगी और सेवा की विरासत को भुलाया नहीं जा सकता। वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी छोड़ी हुई प्रेरणा और कार्य आज भी जीवित हैं। उनकी विरासत को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

9 अगस्त को उनकी पुण्यतिथि पर हम परिवार एवं क्षेत्रवासी उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और उनके जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेंगे।

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