
जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया।
देश की सुप्रसिद्ध धरती बलिया का विश्वविद्यालय ,जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय का मूर्त रूप साकार हो रहा है ।
वे सभी सपने साकार होने लगे हैं, जिसको बलिया के कभी पूर्वजों ने देखा था ।जो कभी जननायक चंद्रशेखर जी के मन मस्तिष्क में रहा होगा ।
उन सपनों को जमीन पर उतार रहे हैं ,हमारे कुलपति प्रोफेसर संजीत कुमार गुप्त ।
कुलपति जी की परिसर के निर्माण में बड़ी भूमिका है ।अत्यंत ऊर्जावान है ।
दिन-रात मेहनत करते हैं। कार्यालय में बैठने का समय नहीं।
धूप कमें 40 से लेकर 45 डिग्री के तापमान में ,बिना थके, बिना रुके ,बिना खाए पिए ,निरंतर सुबह से रात तक लगातार परिसर को सजाने संवारने में लगे हैं ।
सम्राट अशोक के प्राचीन भारत के वे सभी चिन्ह जो कभी अखंड भारत के लिए विजय पताका थे,उन सभी को विश्वविद्यालय में स्थापित किया गया है ।
सम्राट अशोक की लाट और अनेक ऐसे अवसर जो आपको प्रभावित करेंगे। लाल पत्थरों से बनी हुई कुर्सियां मेज ,सनातन परंपरा के चिन्ह ज्योतिपुंज लग रहे हैं ।
नया मंदिर और उसके साथ ही केशव भवन ,विश्वविद्यालय में सामाजिक और धार्मिक रूप से समझ रखने वाले लोगों के लिए एक बड़ा साधना केंद्र है ।
कई ऐसे चिन्ह विश्वविद्यालय में बन रहे हैं जो आने वाले समय में दूसरे विश्वविद्यालय देखकर के अपने यहां बनाएंगे।
परिसर में आज पहुंचने पर माननीय कुलपति जी से कुल सचिव महोदय से और अनेक लोगों से परीक्षा की सुचिता के साथ-साथ, विश्वविद्यालय की प्रगति ,जननायक चंद्रशेखर जी के जन्म शताब्दी समारोह और अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त करने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ।


