


सरकारी जमीन माफिया को सौंपी कब्जे से मुक्त कराने के लिए
भाजपा पार्षद की इलाहाबाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल पेंडिंग
हाउसिंग प्रोजक्ट ‘मन्नत रेजीडेंसी’ की बीती 22 मई को मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (MVDA) ने खोली सील
संवाददाता आलोक तिवारी
जिस सरकारी जमीन को माफिया के कब्जे से मुक्त कराने के लिए सत्ताधारी दल भाजपा के ही एक पार्षद ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की हुई है, उससे जुड़े हाउसिंग प्रोजक्ट ‘मन्नत रेजीडेंसी’ की बीती 22 मई को मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (MVDA) ने न सिर्फ सील खोल दी बल्कि ये कहते हुए क्लीन चिट भी दे दी कि अब कोई विवाद शेष नहीं है जबकि इलाहाबाद हाई कोर्ट में यह PIL अब भी लंबित है और इसका स्टेटस हाई कोर्ट की वेबसाइट पर जाकर कोई भी चेक कर सकता है।
इस संबंध में विकास प्राधिकरण के सचिव आशीष कुमार सिंह से जब जानकारी की गई तो उन्होंने बड़ी ‘बेशर्मी’ के साथ स्वीकार किया कि ‘मन्नत रेजीडेंसी’ की सील खोल दी गई है क्योंकि विभिन्न विभागों से ऐसी जानकारी हमें प्राप्त हुई थी। उनके अनुसार ‘मन्नत रेजीडेंसी’ को लेकर अब मथुरा-वृंदावन नगर निगम को भी कोई आपत्ति नहीं है।
देखिए मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के सचिव आशीष कुमार सिंह ने इस बावत क्या-क्या कहा-सचिव विकास प्राधिकरण आशीष कुमार सिंह के कथन से स्पष्ट होता है कि उन्हें इस पूरे प्रकरण और इसे लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित जनहित याचिका की पूरी जानकारी थी, बावजूद इसके उन्होंने ये दुस्साहस करके हाई कोर्ट को सीधी चुनौती दी है। गौरतलब है कि मथुरा के पॉश एरिया मसानी लिंक रोड पर जहां मन्नत रेजीडेंसी खड़ी की जा रही है, वहां बाकायदा कभी मथुरा-वृंदावन नगर निगम के बोर्ड लगे हुए थे और उन पर चेतावनी भी दर्ज थी, किंतु माफिया ने नगर निगम की जमीन कब्जाने के लिए इन बोर्डों को ‘जमींदोज’ कर दिया ताकि आगे कोई उंगली न उठा सके। ये फोटो इसकी गवाही दे सकते हैं। सचिव विकास प्राधिकरण ने इतनी बड़ी हिमाकत क्यों और कैसे की होगी, इसका अंदाज हर वो व्यक्ति लगा सकता है जिसका कभी किसी मामले में इस विभाग से वास्ता पड़ा होगा। यही नहीं, जिनका वास्ता न भी पड़ा हो, वो भी मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की कारगुजारियों से भलीभांति वाकिफ रहते हैं क्योंकि भ्रष्टाचार इस विभाग की कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग जो है।
देखें सचिव आशीष कुमार सिंह के हस्ताक्षर से 22 मई का जारी किया गया वो आदेश जो उनके गले की फांस बन सकता है- सचिव विकास प्राधिकरण ने इतनी बड़ी हिमाकत क्यों और कैसे की होगी, इसका अंदाज हर वो व्यक्ति लगा सकता है जिसका कभी किसी मामले में इस विभाग से वास्ता पड़ा होगा। यही नहीं, जिनका वास्ता न भी पड़ा हो, वो भी मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की कारगुजारियों से भलीभांति वाकिफ रहते हैं क्योंकि भ्रष्टाचार इस विभाग की कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग जो है।
देखें सचिव आशीष कुमार सिंह के हस्ताक्षर से 22 मई का जारी किया गया वो आदेश जो उनके गले की फांस बन सकता है- दरअसल, सचिव आशीष कुमार सिंह ने ये सारा खेल यूं ही नहीं खेला। वो जानते हैं कि यूपी का मथुरा एक ऐसा जिला है जहां उनके पूर्ववर्ती अधिकारियों ने भी खूब मनमानी की है, लेकिन उनमें से आज तक किसी का कुछ नहीं बिगड़ा। इसके ठीक उलट उनमें से कुछ अधिकारी तो आज उनके बॉस बने बैठे हैं।
हो सकता है कि आशीष कुमार सिंह ने उन्हीं से प्राप्त ‘फीडबैक’ के आधार पर इतना खुलकर खेलने की हिम्मत जुटा ली हो और इलाहाबाद हाई कोर्ट को सीधी चुनौती दे डाली लेकिन जरूरी नहीं कि यदि पूर्ववर्तियों का दांव सीधा पड़ गया तो अब भी यथास्थिति कायम रहेगी।
इस बार दांव उल्टा पड़ जाने की पूरी संभावना है, वो इसलिए कि याचिकाकर्ता ब्रजेश खरे ने इस मामले में अदालत की अवमानना का केस फाइल करने की पूरी तैयारी कर ली है।
जहां तक सवाल है उसके लिए जरूरी दस्तावेजों का तो वो खुद सचिव ने अपने हस्ताक्षरित पत्र तथा मीडिया को ऑन कैमरा दिए गए बयान से उसकी पूर्ति कर दी है।


