
हाई कोर्ट की अवमानना के डर से अजमेर में दरगाह के निकट अवैध निर्माण का टूटना शुरू।
दरगाह कमेटी के नाजिम और नगर निगम के आयुक्त के खिलाफ 28 अप्रैल को सुनवाई होनी है।
======
जनता का सच
स्टंट चीफ राधामोहन अग्रवाल
अजमेर में ख्वाजा साहब की दरगाह के निकट सोलह खंभा में शौचालय परिसर में हुए अवैध निर्माण का अब टूटना शुरू हो गया है। केंद्रीय सरकार के अधीन काम करने वाली दरगाह कमेटी के कर्मचारियों ने नगर निगम के सहयोग से अवैध निर्माण को तोड़ने की कार्यवाही शुरू की है। मालूम हो कि शौचालय परिसर में कार्यालय आदि के निर्माण को लेकर दरगाह कमेटी और दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन के बीच एक एमओयू हुआ था। इस एमओयू के तहत ही दरगाह दीवान की ओर से नगर निगम से नक्शा स्वीकृत करवाया गया। लेकिन मौके पर नक्शे के विपरीत निर्माण कार्य हुआ। इस अवैध निर्माण को लेकर याचिकाकर्ता सैयद फखर काजमी चिश्ती, सैयद बाबर हुसैन चिश्ती, अब्दुल नईम, गुलाम मुस्तफा और अनवर अली ने अपने अधिवक्ता आशीष सक्सेना और हर्षित मित्तल के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट में नगर निगम ने अपने जवाब में माना की मौके पर नक्शे के विरुद्ध निर्माण हुआ है। यह भी स्वीकार किया गया कि पूर्व में इस भूखंड का उपयोग सिर्फ शौचालय के लिए ही होता रहा है। इस जवाब के बाद निगम और दरगाह कमेटी को अवैध निर्माण को तोड़ना चाहिया था। लेकिन दोनों ही संस्थाओं ने लापरवाही बरती। इस पर याचिकताओं ने अवमानना का प्रार्थना पत्र हाईकोर्ट में दायर यिका। इस अवमानना पर आगामी 28 अप्रैल को सुनवाई होनी है। अदालत ने नगर निगम के आयुक्त और दरगाह कमेटी के नाजिम को अवमानना के नोटिस जारी कर रखे है। यही वजह रही कि अवमानना के डर की वजह से अब सोलह खंभा क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण को तोड़ा जा रहा है। इस बीच याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अभी भी संपूर्ण अवैध निर्माण को नहीं तोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि 28 अप्रैल को जब हाईकोर्ट में सुनवाई होगी, तो वस्तु स्थिति को रखा जाएगा। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सार्वजनिक स्थल की जमीन पर दरगाह कमेटी और दरगाह दीवान ने तथ्यों को छीपा कर एमओयू साइन किया है। पूर्व में यहां बने शौचालय दरगाह में आने वाले जायरीन के लिए ही काम आते थे, लेकिन अब शौचालयों के स्थान पर दुकानें दफ्तर आदि का निर्माण किया गया है।


