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संघ की शाखा में व्यक्तित्व निर्माण, इससे हिंदू समाज में विश्वास जागरण-निंबाराम।


संघ की शाखा में व्यक्तित्व निर्माण, इससे हिंदू समाज में विश्वास जागरण-निंबाराम।

राजस्थान के 38 सौ मदरसों को शिक्षा बोर्ड के अधीन लाया जाए-डॉ. सुरेंद्र जैन।

पुष्कर में विश्व हिंदू परिषद का अधिवक्ता अधिवेशन।
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जनता का सच
स्टेट चीफ राधामोहन अग्रवाल
11 अप्रैल को पुष्कर तीर्थ में विश्व हिंदू परिषद राजस्थान क्षेत्र के दो दिवसीय अधिवक्ता अधिवेशन की शुरुआत हुई। उद्घाटन समारोह में मुख्य वक्ता के तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक निंबाराम ने कहा कि संघ की शाखा में व्यक्तित्व निर्माण का काम किया जाता है। स्वयं सेवक पूरे समाज को दिशा देने का काम करता है। स्वयं सेवक निस्वार्थ भाव से राष्ट्र के लिए काम करते हैं। हिंदू संगठन हमेशा हिंदू समाज में विश्वास का भाव जागृत करते हैं। यही वजह है कि अब हिंदू संगठनों का समाज में प्रभाव भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि देश को गुलामी से मुक्त करवाने के लिए संगठित समाज और व्यक्ति निर्माण का तंत्र खड़ा करना आवश्यक था। ऐसा होने से ही देश स्वतंत्र हुआ और आज आत्म विश्वास के सााि देश आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्वयं सेवक समाज के किसी भी क्षेत्र में काम करे वह अपनी राष्ट्र भावना प्रदर्शित करता ही है। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद से जुड़े अधिवक्ताओं ने भी हिंदू समाज को न्याय दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मदरसे बोर्ड के अधीन हो:
समारोह में विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने कहा कि राजस्थान में मदरसा बोर्ड को भंग किया जाना चाहिए। प्रदेश में जो तीन हजार 800 मदरसे चल रहे हैं उन्हें राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अधीन लाना चाहिए। तकि मुस्लिम बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में मदरसों पर कोई कानून लागू नहीं होता। वे नेशनल एजुकेशन पॉलिसी की जिम्मेदारी से भी बचते हैं। उन्होंने कहा कि विहिप की ओर से इस संबंध में शीघ्र की एक मांग पत्र राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वक्फ के नए कानून की वजह से देश में 25 हजार संपत्तियों से वक्फ बोर्ड के दावे खारिज हुए हैं। इनमें राजस्थान के चार हजार 802 दावे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नए कानून की वजह से वक्फ संपत्तियों का न केवल संरक्षण होगा, बल्कि इसका लाभ गरीब मुसलमान को मिलेगा।

मौलिक अधिकारों की रक्षा:
समारोह में न्यायमूर्ति मदन गोपाल व्यास ने कहा, संविधान में आम व्यक्ति को जो मौलिक अधिकार दे रखे हैं, उनकी रक्षा अधिवक्ताओं को करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सेवा सिर्फ सेना में जाकर ही नहीं बल्कि पीडि़त व्यक्ति को न्याय दिलाकर भी की जा सकती है। भारत में लोकतंत्र में न्याय व्यवस्था को एक मजबूत स्तंभ माना गया है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता संविधान का जीवंत दूत हैं। समारोह में संगठन मंत्री राजाराम शर्मा, सुरेश उपाध्याय, ट्रस्ट पूर्व आईएएस स्नेहलता पंवार आदि ने भी अपने विचार रखे। इस दो दिवसीय अधिवेशन में प्रदेश के 700 से भी ज्यादा वकीलों ने भाग लिया।

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