
मुख्यमंत्री जी! पुलिस को यदि बजरी से दूर रखना चाहते हो, तो पहले विधायकों को बजरी से अलग करना होगा।
विधायक और पुलिस की मिलीभगत से ही बजरी का अवैध खनन।
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जनता का सच
स्टेट चीफ राधामोहन अग्रवाल
10 अप्रैल को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय पहुंचकर प्रदेश की कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक ली। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण रही कि गृह विभाग भी मुख्यमंत्री के पास ही है। इस बैठक में सीएम शर्मा ने कहा बजरी मामलों में पुलिस का नाम नहीं आना चाहिए। असल में सीएम शर्मा को भी यह पता है कि अवैध बजरी खनन से पुलिस की बदनामी होती है। अकसर यह आरोप लगता है कि पुलिस की मिली भगत से ही बजरी का अवैध परिवहन होता है। यह सही है कि बजरी की वजह से पुलिस की बदनामी होती है। लेकिन यदि मुख्यमंत्री को अपनी पुलिस को बजरी से अलग रखना है तो उन्हें पहले विधायकों को बजरी से दूर करना होगा। मुख्यमंत्री माने या नहीं लेकिन क्षेत्रीय विधायक और पुलिस की मिलीभगत से ही बजरी का कारोबार होता है। किसी भी थाना अधिकारी और डीएसपी की इतनी हिम्मत नहीं की वह विधायक की मर्जी के बगैर बजरी का अवैध परिवहन करवाए। पुलिस तभी बजरी का कारोबार कर पाती है, जब क्षेत्रीय विधायक की सहमति होती है। यदि कोई विधायक न चाहे तो उसके क्षेत्र में बजरी का कारोबार नहीं हो सकता। विधायक भाजपा का हो या कांग्रेस का। दोनों पार्टियों के विधायकों की रुचि बजरी के अवैध खनन में रहती है। ऐसे आरोप अक्सर लगते हैं। भाजपा की सरकार होने के कारण भाजपा विधायक का रुतबा पहले से ही होता है, जबकि कांग्रेस का विधायक विधानसभा में सवाल लगाने की बात कह कर अपना रुतबा कायम कर लेता है। यही वजह है कि कोई भी विधायक अपने क्षेत्र में बजरी के अवैध खनन का आरोप नहीं लगाता। पुलिस को बजरी के कारोाबर के लिए विधायक को खुश रखना ही पड़ता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अपनी पुलिस की इमेज सुधारने का काम किया। लेकिन मुख्यमंत्री को यह समझना होगा कि पुलिस बजरी से तभी अलग हो सकती है, जब विधायक बजरी से दूर हो। अच्छा हो मुख्यमंत्री इस संबंध में विधायकों को भी आवश्यक दिशा निर्देश दे।


