
पंचायत चुनाव में देरी की आशंका, प्रतिनिधियों ने कार्यकाल बढ़ाने की उठाई मांग जिला संवाददाता अर्जुन सिंह
#संतकबीरनगर। प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों के आगामी चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति के बीच पंचायत प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कार्यकाल एक वर्ष बढ़ाने की मांग की है। प्रतिनिधियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में समय पर चुनाव कराना संभव नहीं दिख रहा है।
ज्ञापन में बताया गया कि प्रदेश की पंचायतों का कार्यकाल 26 मई, 12 जुलाई और 20 जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है। वहीं मतदाता सूची पुनरीक्षण में देरी, समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन लंबित होने और सुप्रीम कोर्ट के “ट्रिपल टेस्ट” की प्रक्रिया पूरी न होने से चुनाव समय पर कराना मुश्किल नजर आ रहा है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि अधूरी कानूनी प्रक्रियाओं के बीच चुनाव कराना उचित नहीं होगा और इससे चुनाव की वैधता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए गए तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत होगा।
ज्ञापन में पूर्व के उदाहरण देते हुए कहा गया कि जब-जब प्रशासकों की नियुक्ति हुई, तब पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठे हैं। इसके विपरीत, निर्वाचित प्रतिनिधि जनता के प्रति सीधे जवाबदेह होते हैं और क्षेत्र की जरूरतों को बेहतर समझते हैं।
प्रतिनिधियों ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड का हवाला देते हुए कहा कि वहां समान परिस्थितियों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को ही जिम्मेदारी देकर व्यवस्था को सुचारु रखा गया।
मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि वर्तमान हालात को देखते हुए पंचायतों का कार्यकाल एक वर्ष बढ़ाया जाए। साथ ही, निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति देते हुए जल्द शासनादेश जारी करने की अपील की गई है, ताकि ग्रामीण विकास कार्य प्रभावित न हों और लोकतांत्रिक व्यवस्था बनी रहे।


