
देवनानी विधानसभा के अध्यक्ष हैं, इसलिए अजमेर में राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय खुलेगा।
38 साल पहले डीएवी कॉलेज में शुरू हुआ था अजमेर विश्वविद्यालय।
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जनता का सच
स्टेट ब्युरो राधामोहन अग्रवाल
9 मार्च को विधानसभा में राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय विधेयक 2026 ध्वनिमत से मंजूर हो गया। यानी अब अजमेर में यह विश्वविद्यालय खुल जाएगा। यह विश्वविद्यालय अजमेर में इसलिए खुल रहा है कि अजमेर शहर के भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे हैं। यह विश्वविद्यालय अजमेर में खुले इसके लिए देवनानी ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। देवनानी की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस विश्वविद्यालय के लिए 12 हेक्टेयर भूमि महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने दी है। यदि देवनानी का प्रभाव नहीं होता तो एमडीएस वाले कभी भी अपने हिस्से की 12 हेक्टेयर भूमि नहीं देते। जब आयुर्वेद विश्वविद्यालय को अजमेर में खोलने की बात आई तो सरकारी भूमि न होने का अड़ंगा लगाया गया, लेकिन तब देवनानी ने अपने प्रभाव से 12 हेक्टेयर भूमि एमडीएस वालों से ले ली। यह सही है कि इस आयुर्वेद विश्वविद्यालय के लिए जयपुर के राजनेताओं ने भी पूरी ताकत लगाई थी। चूंकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद जयपुर के सांगानेर के विधायक है, इसलिए प्रशासन के बड़े अधिकारी भी चाहते थे कि यह विश्वविद्यालय जयपुर में ही खुले, लेकिन तब देवनानी ने दो टूक शब्दों में कहा कि आयुर्वेद विश्वविद्यालय उनका सपना है और वे अपने सपने को टूटने नहीं देंगे। जानकारों की माने तो देवनानी ने अड़ंगेबाज अफसरों को विधानसभा अध्यक्ष का डंडा भी दिखाया। अब जब 9 मार्च को आयुर्वेद विश्वविद्यालय पर अंतिम मुहर लग गई है, तब कहा जा सकता है कि देवनानी का सपना पूरा हो गया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि देवनानी ने विधानसभा अध्यक्ष के पद का लाभ अपने निर्वाचन क्षेत्र अजमेर को दिलाया है। देवनानी के प्रभाव की वजह से ही अजमेर के कई संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों के नाम भी परिवर्तित हुए हैं।
38 साल पहले:
यूं तो आजादी के बाद अजमेर एक स्वतंत्र राज्य था, लेकिन 1956 में अजमेर राज्य का विलय राजस्थान में हो गया। तब समझौते के मुताबिक अजमेर को राजस्व मंडल, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड जैसे राज्य स्तरीय संस्थान मिले। लेकिन इसके बाद अजमेर को एक भी राज्यस्तरीय संस्थान नहीं मिल सका। 38 साल पहले अजमेर विश्वविद्यालय के बाद यह पहला अवसर है, जब अजमेर को कोई राज्य स्तरीय संस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के रूप में मिला है। यहां उल्लेखनीय है कि 38 साल पहले जब अजमेर विश्वविद्यालय की घोषणा हुई तो तब इस विश्वविद्यालय के भूमि नहीं थी, इसलिए ब्यावर रोड स्थित डीएवी कॉलेज के भवन में अस्थायी तौर पर विश्वविद्यालय की शुरुआत की गई। तब विश्वविद्यालय को प्रतिमाह किराया देना पड़ता था। बाद में जब अजमेर विश्वविद्यालय का नाम महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय रखा गया तब सरकार ने भूमि का भी आवंटन किया। यह एक संयोग ही है कि अब एमडीएस विश्वविद्यालय ही आयुर्वेद विश्वविद्यालय के लिए भूमि दे रहा है।


