
अवमानना की कार्यवाही पर उच्चन्यायालय ने लगाई रोक
एल डी ए की मनमानी पर लगी हाई कोर्ट से रोक
इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए विशेष अपील संख्या 99/2026 (दिनेश कुमार बनाम उपाध्यक्ष, लखनऊ विकास प्राधिकरण एवं अन्य) में अपील स्वीकार करते हुए दिनांक 17.02.2026 को पारित अवमानना आदेश पर रोक लगा दी है।
माननीय न्यायमूर्ति राजन राय तथा माननीय न्यायमूर्ति अब्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। न्यायालय के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि विवादित भूमि गाटा संख्या 242 से संबंधित प्रकरण में पूर्व से ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिकाएँ एवं सिविल अपीलें लंबित हैं तथा दिनांक 20.08.2018 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का अंतरिम आदेश पारित किया गया है। साथ ही राज्य सरकार को किसी भी प्रकार के तृतीय पक्ष अधिकार सृजित न करने का निर्देश भी दिया गया था।
लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा उक्त आदेश की व्याख्या/स्पष्टीकरण हेतु सर्वोच्च न्यायालय में आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था, जिसे दिनांक 06.09.2019 को अस्वीकार कर दिया गया। इसके बावजूद अवमानना न्यायालय द्वारा दिनांक 17.02.2026 को पारित आदेश में इन महत्वपूर्ण तथ्यों को समुचित रूप से विचार में नहीं लिया गया।
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया यह पाया कि अवमानना न्यायालय द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के यथास्थिति आदेश की ऐसी व्याख्या की गई जो उसके अधिकार क्षेत्र से परे प्रतीत होती है। न्यायालय ने यह भी कहा कि जब विवादित विषय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तब इस विषय पर अंतिम निर्णय वहीं होना उपयुक्त है।
उक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए उच्च न्यायालय ने दिनांक 17.02.2026 के अवमानना आदेश पर रोक लगा दी तथा यह भी निर्देश दिया कि अवमानना कार्यवाही सर्वोच्च न्यायालय में लंबित विशेष अनुमति याचिकाओं एवं सिविल अपीलों के अंतिम निर्णय तक स्थगित रहेगी।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश पक्षकारों के अधिकारों को प्रभावित किए बिना पारित किया गया है और अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों के परिणाम पर निर्भर करेगा।
मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह पश्चात नियत की गई ।
विजय कुमार पाण्डेय


