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राजस्थान में दो से अधिक संतान वाले माता-पिता भी अब पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव लड़ सकेंगे।


राजस्थान में दो से अधिक संतान वाले माता-पिता भी अब पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव लड़ सकेंगे।

संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान के बाद भाजपा सरकारों को ऐसा फैसला लेना जरूरी हो गया था।
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जनता का सच
स्टेट ब्युरो राधामोहन अग्रवाल
25 फरवरी को भाजपा शासित राजस्थान के मंत्रिमंडल की बैठक मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में फैसला लिया गया कि पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनावों में जब दो से अधिक संतान वाले माता पिता भी चुनाव लड़ सकेंगे। प्रदेश में वन स्टेट वन इलेक्शन के प्लान के अनुरूप अप्रैल और मई माह में दोनों संस्थाओं के चुनाव होने है। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सरकार की ओर से कहा गया कि वर्ष 1995 में जब दो से अधिक संतान वाले माता पिता पर चुनाव लड़ने का प्रतिबंध लगाया गया था, तब जनसंख्या की वृद्धि दर 3.6 प्रतिशत थी, तब बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए ऐसा प्रतिबंध लगाया गया। लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि जनसंख्या वृद्धि दर 2 प्रतिशत से भी कम है। घटती वृद्धि दर को देखते हुए ही सरकार ने दो से अधिक संतान वाले माता पिता को चुनाव लड़ने की छूट दी है।

भागवत का बयान:
सरकार कुछ भी तर्क दे, लेकिन भाजपा शासित राज्यों को ऐसे फैसले करना जरूरी हो गया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत अपने बयानों में लगातार कह रहे हैं कि हिंदू परिवारों को अब दो से अधिक संतान पैदा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में जनसंख्या का असंतुलन न हो इसके लिए हिंदू परिवारों के सदस्यों की संख्या भी बढऩी चाहिए। स्वाभाविक है कि जब संघ प्रमुख भागवत दो से अधिक संतानों के जन्म की बात कर रहे हैं, तब किसी भी भाजपा शासित राज्य में दो से अधिक संतान वाले माता पिता को चुनाव लडऩे से नहीं रोका जा सकता। राजस्थान में भाजपा सरकार ने 25 फरवरी को जो फैसला किया है, उसके पीछे संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान ही है।

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