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पीएम मोदी के आने से पहले अजमेर नगर निगम के सफाई कर्मियों की हड़ताल।


पीएम मोदी के आने से पहले अजमेर नगर निगम के सफाई कर्मियों की हड़ताल।

क्या भाजपा के नेता सिर्फ सत्ता का सुख भोगने के लिए है?
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जनता का सच
स्टेट ब्युरो राधामोहन अग्रवाल
21 फरवरी को अजमेर नगर निगम के सफाई कर्मियों की हड़ताल का छठा दिन रहा। 6 दिनों से हो रही हड़ताल के कारण अजमेर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सफाई कर्मियों की यह हड़ताल तब हो रही है, जब 28 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अजमेर आ रहे हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार अजमेर की कायड़ विश्राम स्थली पर पीएम मोदी की सभा होगी। इस सभा में केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों की उपलब्धियों भी बताई जाएगी। 23 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी पीएम मोदी अजमेर से ही करेंगे। इतना ही नहीं 21 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र भी दिए जाएंगे। यह बताने का प्रयास किया जाएगा कि डबल इंजन की सरकार के कारण राजस्थान का विकास तेजी से हो रहा है। एक और भाजपा सरकार की उजली तस्वीर दिखाने का काम हो रहा है, तो दूसरी ओर अजमेर नगर निगम के सफाई कर्मचारी पिछले 6 दिनों से हड़ताल पर है। हड़ताल की शुरुआत 2250 सफाई ठेका कर्मियों ने शुरू की थी और इसमें 1400 स्थायी कर्मचारी भी शामिल हो गए। अब निगम के मंत्रालयिक कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो गए है। यानी नगर निगम का कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। अजमेर में यह हड़ताल तब हो रही है, जब मात्र 15 दिन पहले तक नगर निगम पर भाजपा का बोर्ड काबिज था। गत 6 फरवरी को ही भाजपा की मेयर ब्रज लता हाड़ा का कार्यकाल पूरा हुआ है। इसके साथ ही शहर की दोनों विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। अजमेर के सांसद भागीरथ चौधरी केंद्र में कृषि राज्यमंत्री के पद पर है। इसके साथ ही अजमेर शहर की सीमा से लगे पुष्कर के भाजपा विधायक सुरेश रावत राज्य में केबिनेट मंत्री है। अजमेर के ही ओंकार सिंह लखावत तथा ओम प्रकाश भडाना को राज्यमंत्री का दर्जा मिला हुआ है। सवाल उठता है कि क्या भाजपा के नेता सिर्फ सत्ता का सुख भोगने के लिए हैं? यह माना कि मौजूदा समय में अजमेर के संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह राठौड़ नगर निगम के प्रशासक हैं, इसलिए हड़ताल की सीधी जिम्मेदारी प्रशासन की बनती है। प्रशासन को ही कार्मिकों से वार्ता कर समाधान निकालना चाहिए। लेकिन जब भाजपा के नेता सत्ता की मलाई खा रहे हैं, तब भाजपा के नेताओं का भी यह दायित्व बनता है कि निगम के कर्मचारियों की हड़ताल को समाप्त कराया जाए। भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी तो स्वयं निवर्तमान पार्षद भी है। जब सोनी की देखरेख में ही पीएम मोदी की सभा हो रही है, तब सोनी का भी दायित्व बनता है कि वह हड़ताल को समाप्त करवावें। जहां तक सफाई कर्मियों की हड़ताल का सवाल है तो मांगे कोई ज्यादा बड़ी भी नहीं है। 2250 सफाई ठेका कर्मियों की मांग समय पर वेतन न मिलने की है, जबकि स्थायी सफाई कर्मचारी चाहते हैं कि गत वर्ष जितने अस्थायी सफाई कर्मियों की नियुक्ति का टेंडर हुआ उसी के अनुरूप इस वर्ष भी अस्थायी सफाई कर्मियों का टेंडर किया जाए। अस्थायी सफाई कर्मियों को समय पर वेतन मिलने इस पर किसी को भी ऐतराज नहीं होना चाहिए। अस्थायी कर्मियों को समय पर वेतन देने की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की है। यह भी सही है कि अजमेर नगर गिनम की शहरी सीमा का विस्तार होने के कारण सफाई कर्मियों की संख्या भी बढऩी चाहिए।

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