
विधायकों की सिफारिशों ने राजस्थान में चिकित्सा सेवाओं का हाल बिगाड़ रखा है।
चिकित्सा मंत्री खींवसर ने विधानसभा में बताई अपनी लाचारी।
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जनता का सच
स्टेट ब्युरो राधामोहन अग्रवाल
राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने 19 फरवरी को विधानसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि यदि विधायकगण कोई सिफारिश न करे तो मैं प्रदेश भर के अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती कर दूं। यदि मुझे काम करने की पूरी स्वतंत्रता मिले तो सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक का एक पद भी खाली नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि विधायकगण अपने निर्वाचन क्षेत्र के अस्पतालों में चिकित्सक के पद रिक्त होने की बात तो उठाते हैं, लेकिन मुझे सहयोग नहीं करते। कई अस्पतालों में निर्धारित पदों से ज्यादा चिकित्सक नियुक्त है। असल में विधायक दबाव डालकर अपने चहेते चिकित्सकों की नियुक्तियां अथवा प्रतिनियुक्ति में करवा लेते हैं। मेरी यह मजबूरी होती है कि मुझे विधायकों की बात माननी पड़ती है। यही वजह है कि कई अस्पतालों में चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं। चिकित्सा मंत्री खींवसर ने विधानसभा में जो बात कही वह बेहद ही गंभीर है। मंत्री के बयान बयान से साफ जाहिर है कि प्रदेश की बिगड़ी चिकित्सा व्यवस्था के लिए विधायक गण जिम्मेदार है। यदि विधायक ही गलत काम करवाएंगे तो फिर आम जनता की सुनवाई कैसे होगी। 19 फरवरी को जब खींवसर ने यह गंभीर बयान दिया, तब प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली भी चुप रहे। जबकि आमतौर पर जूली विधायकों के सवालों पर सरकार की आलोचना करते हैं। जूली और कांग्रेस विधायकों की चुप्पी से जाहिर है कि चिकित्सकों की सिफारिश करने वालों में कांग्रेस के विधायक भी शामिल हैं।


