
तो अशोक गहलोत को जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफे देने का असली कारण पता चल गया है।
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जनता का अच
स्टेट ब्युरो राधामोहन अग्रवाल
गत वर्ष उपराष्ट्रपति के पद से अचानक इस्तीफा देने वाले जगदीप धनखड़ और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच 13 फरवरी को जयपुर स्थित राजभवन में वन टू वन मुलाकात हुई। असल में यह दोनों नेता 12 फरवरी को किशनगढ़ में कांग्रेस विधायक विकास चौधरी के छोटे भाई के विवाह समारोह में मिले थे और तभी विस्तार से बात करने के लिए 13 फरवरी का दिन निर्धारित हुआ। धनखड़ से मुलाकात करने के लिए गहलोत स्वयं राजभवन गए और मुलाकात के बाद गहलोत ने ही सोशल मीडिया पर धनखउ़ के साथ वाला फोटो पोस्ट किया। गहलोत ने भले ही 15 घंटे में दो बार धनखड़ से मुलाकात की हो, लेकिन ये वो ही अशोक गहलोत हैं जिन्होंने जगदीप धनखड़ को बार बार राजस्थान आने पर ऐतराज जताया था। मालूम हो कि धनखड़ जब उपराष्ट्रपति बने तब अशोक गहलोत राजस्थान में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री थे। चूंकि धनखड़ भी राजस्थान के ही हैं, इसलिए उपराष्ट्रपति बनने के बाद उनका राजस्थान आना लगा रहा। बार बार राजस्थान आने पर तब गहलोत ने ऐतराज जताया था, लेकिन जब धनखड़ ने उपराष्ट्रपति के पद से अचानक इस्तीफा दे दिया तो अशोक गहलोत धनखड़ से मिलने को उतावले हो गए। जब लाख कोशिश के बाद भी गहलोत से धनखड़ नहीं मिल सके तो अपनी नाराजगी गहलोत ने सोशल मीडिया पर प्रकट की। गहलोत का कहना रहा कि पूरा देश जानना चाहता है कि आखिर धनखड़ ने उपराष्ट्रपति के पद से अचानक इस्तीफा क्यों दिया? उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने के बाद संभव: 13 फरवरी को पहला अवसर रहा, जब अशोक गहलोत और जगदीप धनखड़ के बीच वन टू वन मुलाकात हुई। स्वाभाविक है कि इस मुलाकात में धनखड़ ने वो कारण गहलोत को बताए होंगे जिनकी वजह से दो वर्ष पहले ही उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देना पड़ा। यानी अब अशोक गहलोत कांग्रेस के एकमात्र नेता है जिन्हें धनखड़ के इस्तीफे के कारण का पता चल गया है। मालूम हो कि जगदीप धनखड़ पूर्व में कांग्रेस में रह चुके हैं। वे कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर ही अजमेर के किशनगढ़ से विधायक बने थे। धनखड़ के गहलोत से अच्छे संबंध रहे हैं। हालांकि इस्तीफे के बाद से धनखड़ ने केंद्र सरकार को लेकर कोई प्रतिकूल बयान नहीं दिया है,लेकिन 13 फरवरी को गहलोत से मुलाकात के बाद अनेक राजनीतिक चर्चाएं व्याप्त हैं। धनखड़ ने गहलोत से व्यक्तिगत तौर पर तब मुलाकात की है, जब दिल्ली में धनखड़ ने अपनी राजनीतिक गतिविधियों को बहुत सीमित कर रखा है। देखना होगा कि धनखड़ गहलोत की यह मुलाकात आने वाले दिनों में राजनीति का कौन सा फूल खिलाती है ।


