
ओउमाश्रय सेवा धाम में वसंत पंचमी पर्व मनाया।
सरस्वती की कृपा थी तो हम अपने आचरण से शिक्षा देकर विश्व गुरु कहाए:-” यश
जनता का सच
स्टेट ब्युरो राधामोहन अग्रवाल
जयपुर , मां सरस्वती की कृपा से जब हमारे आचार्य गुरू संत महात्मा व़ाह्मण अपने अहिंसा सत्य अस्तेय ब्रह्मचर्य अपरिग्रही आचरण तथा सत्य से मन ,तप विद्या द्वारा आत्मा तथा ज्ञान से शुद्ध वुद्धि सन्तोष तप स्वाध्याय एवं ईश्वर समर्पण भाव से दुनिया को शिक्षा देते थे तब विश्व गुरु कहाते थे। उक्त कथन वैदिक चिंतक ओउमाश्रय संस्थापक यशपाल यश ने वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा की पद्धति और महिमा बताते हुए कही।यश ने कहा कि हम विद्या सा विमुक्तये के भाव से हमारे गुरुकुलों में समान खान-पान वस्त्र व्यवहार मिलता था चाहे राजा का राजकुमार या दरिद्र की संतान। संदीपन गुरु के यंहा श्रीकृष्ण और सुदामा एक साथ बैठकर विद्या गृहण करते थे।यश ने कहा कि जब हम विश्व गुरु थे तो प़ेम सद्भाव विश्व बंधुत्व वसुधैव कुटुम्बकम् के भाव से परिपूर्ण थे।
ओउमाश्रय के सचिव डॉ प़मोद पाल एवं संचालन सहयोगी भगवान दास गर्ग ने बताया कि इस अवसर पर वडी संख्या में उपस्थित हुए महिला पुरुष बच्चों ने यज्ञ में आहुतियां दी।
फ्लोरिडा यू एस ए आई श्रीमति अदिति गोस्वामी ने विजय श्रीमति लक्ष्मी मजूमदार शिव प्रकाश प़दीप सिंह ने पैंसठ ऊनी इनर भैट किए।


