
स्वजन नहीं सुजन के लिए अनासक्त भाव यज्ञ कर्म यज्ञशेष का भोग कर्मानुसार वर्ण व्यवस्था गीता ज्ञान अपनाएं तो भारत और विश्व में सहज शांति -” यश” ओउमाश्रय में गीता जयंती पर चर्चा, यज्ञ व गौसेवा सम्पन्न।
जनता सच
स्टेट ब्युरो राधामोहन अग्रवाल
जयपुर, खासकर भारत और विश्व मानवता पर अज्ञानता से जाये संकटों असुरक्षा आपसी भेदभाव खींच तान और जाति धर्म आस्था के नाम पर कोहराम का एकमात्र उपाय गीता संदेश को ईमानदारी से व्यवहार में लाना है। उक्त कथन वैदिक चिंतक ओउमाश्रय संस्थापक यशपाल यश ने ओउमाश्रय सेवा धाम में व्यक्त किए।यश ने कहा कि गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को तीसरे चौथे सातवें अध्याय में स्पष्ट करते हैं परिजन रिश्तेदार मित्रों को कैसे मारू घवराहठ बेचैनी कण्ठ खुश्क धनुष छूट रहा है कहने पर समझा रहे हैं। श्रीकृष्ण कहते हैं क्षत्रिय का धर्म स्वजन रक्षा नहीं सुजन रक्षा है।यश ने कहा कि तू अनासक्त भाव से यज्ञ कर्म जन कल्याण कारी कार्य और तप पूर्वक परोपकारी कार्यों से वचे यज्ञशेष का भोग करते हुए जन्मगत की जगह कर्मानुसार वर्ण व्यवस्था को अपना।यश ने कहा कि यज्ञ यानि दान संगतिकरण देव पूजा द्वारा प्रकृति और प़ाणि मात्र के सम्मान सुरक्षा हेतु अन्यायी का वध कर जीता तो चक्रवर्ती सम्राट वनेगा हारा तो मोक्ष पाएगा।
यश ने कहा कि गीता निष्काम भाव से वृह्माग्नि में वृह्म हवि देने का संदेश देती है यानी सभी आहुतियां परम पिता परमेश्वर के लिए हैं अपने लिए नहीं।
यश ने कहा कि श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे नासमझ हैं जो मुझ अव्यक्त को व्यक्त मानकर अवतार समझते हैं।यश ने कहा कि गीता समाधान ग़ंथ है जिसमें हर समस्या का समाधान है आवश्यकता ईमानदारी से प़यास की है।
संचालक देवेश गोयल ने बताया कि वीरेंद्र गर्ग श्रीमति मोनिका शतीश गुप्ता श्रीमति मंदाकिनी विनोद गर्ग श्रीमति सुनीता विजय श्रीमति सपना शेलेन्द्र गर्ग चिन्मय अभिषेक विजय तनवी रक्षित श्रीमति सीमा वंशल रमेश श्रीमति शांति विजय आदि ने आहुतियां दी।
रेल अधिकारी रहे अनिल गुप्ता श्रीमति सुमन गुप्ता श्रीमति कृति झा अमन अग़बाल ने गौ सेवा की।


