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जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अमले की उदासीनता के चलते नरकीय जीवन जीने को मजबूर ग्रामीण::–


8 अगस्त 2025
स्थान – मंडवा बंशीपुर
रिपोर्ट:-ओमवीर सिंह

जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अमले की उदासीनता के चलते नरकीय जीवन जीने को मजबूर ग्रामीण::–

लोगों का दुर्भाग्य कहें या जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की लापरवाही? एक तरफ हम आजादी की 78 वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं बहीं आजादी के इतने समय बाद भी कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां का जीवन काफी कठिनाइयों व मुश्किल भरा है। आज भी लोग टूटे फ़ूटे कीचड़ गंदगी भरे रास्तों पर निकलने को मजबूर हैं। सरकारें दावा करती हैं कि हमने सभी सड़कें गड्ढा मुक्त कर दी हैं यह एक छलावा है । लगभग 30 बर्ष से बरेली जिले की मीरगंज तहसील की पंचायत मंडवा बंशीपुर का गांव मंडवा है। मंडवा के लिए कहने को चार-चार रास्ते हैं लेकिन सभी बुरी तरह से टूटे फ़ूटे गड्डा युक्त होने के कारण उनसे निकलना दुश्वार होता है। सन् 2001 से यहां के बासिन्दों को केवल आश्वासन ही मिला सड़क नहीं मिली। गांव में लगभग 600 मतदाता हैं और आबादी 1200 से अधिक। गांव बालों के अनुसार यह सड़क 90 के दशक में यहां के विधानपरिषद सदस्य जयदीप सिंह बरार के समय में बनी है। क्षेत्र और सभी रास्तों मरम्मत का काम समय समय-समय पर हो जाता है किन्तु बंशीपुर से मंडवा के बीच हमेशा छूट जाता है जिसकी दूरी लगभग एक किलोमीटर होगी। पूर्ववर्ती सरकारें सपा, बसपा तथा वर्तमान भाजपा सरकार से भी आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। चुनाव के समय नेता सड़क बनाने का बायदा करते हैं बाद में भूल जाते हैं। मंडवा से जो रास्ता आनन्दपुर के लिए जाता है उस रास्ते को भट्टा स्वामी की मनमानी करने के कारण धूल गुबार से भरा रहता है तथा बारिश होते ही मोटरसाइकिल साइकिल तो दूर की कौड़ी है पैदल निकलना दुश्वार हो जाता है। गांव से पढ़ने जाने बाले बच्चे इससे काफी प्रभावित होते हैं। तीसरा रास्ता जो बलेही से मंडवा को जोड़ता है बह केवल मिट्टी से बना है उसमें काफी गहराई तक खड्डे बन गये हैं। चौथा रास्ता गौंटिया से होकर आता है बह बदहाल स्थिति में है। इससे भी निकलना मुश्किल भरा रहता है।
ग्रामवासियों के अनुसार लोग सांसद, विधायक, जिला पंचायत , मण्डी समिति, ब्लाक प्रमुख , गन्ना समिति सभी जगह सड़क के लिए फरियाद कर चुके हैं लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई मिला है तो केवल आश्वासन।

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