
लूटा महामंत्री पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में बैठी जांच
– योग दिवस की तैयारियों के दौरान हुई बैठक में विवादित टिप्पणी का मामला
– लूटा महामंत्री राममिलन भी कुलपति को दे चुके हैं अपनी सफाई
– फिर उछला जूता प्रकरण
लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के संबंध में 19 जून 2025 को तत्कालीन रजिस्ट्रार विद्यानंद त्रिपाठी द्वारा बुलाई बैठक में लखनऊ विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन के महामंत्री राममिलन यादव पर उनके द्वारा कथित टिप्पणी किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में राममिलन यादव की सफाई आने के कई दिन बाद अब इस मामले में नवनियुक्त रजिस्ट्रार डॉक्टर भावना मिश्रा ने जांच बैठा दी है। दरअसल योग दिवस की तैयारी की बैठक के अगले दिन लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद संघ के महामंत्री संजय शुक्ला ने अपने व्हाट्सएप ग्रुप पर यह लिखा था कि बैठक के दौरान लूटा महामंत्री राम मिलन यादव ने ज़ब तत्कालीन रजिस्ट्रार विद्यानंद त्रिपाठी से यह बात पूछी कि योग दिवस समारोह में आने वाले लोगों को टी-शर्ट और लोअर भी मिलेगा क्या? इस पर कार्यवाहक कुलसचिव विद्यानंद त्रिपाठी ने उनका उपहास उड़ाते हुए बैठक में ही सार्वजनिक रूप से कहा कि आपको लोअर टीशर्ट के साथ में जूता भी मिलेगा। संजय शुक्ला ने अपने व्हाट्सएप ग्रुप पर इस घटना को ऐतिहासिक घटना बताते हुए इस पर रोष जताया था कि शिक्षक संघ के महामंत्री पर इस तरह की टिप्पणी होना बहुत ही गलत है यह व्हाट्सएप इसका स्क्रीनशॉट वायरल हो गया और इसके बाद एक चैनल ने इस पर स्टोरी कर दी जिस पर यह मामला और गर्म आ गया बताया जाता है कि योग दिवस के तुरंत बाद लूट महामंत्री राम मिलन यादव ने भी कुलपति को भेज अपने एक पत्र में इस पूरे प्रकरण में अपनी सफाई दी थी और कहा था कि उनके सामने ऐसी कोई घटना ही नहीं हुई बताते हैं कि इसके बाद कर्मचारी संगठन के महामंत्री संजय शुक्ला ने रजिस्ट्रार और कुलपति को एक और पत्र दिया जिस पर अब लखनऊ विश्वविद्यालय की रजिस्टर्ड डॉक्टर भावना मिश्रा ने 3 सदस्यीय जांच कमेटी बैठाते हुए इस मामले की पूरी जांच कराने की बात कही है।
रजिस्ट्रार डॉ भावना मिश्रा ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि संजय शुक्ला, महामंत्री, लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद् द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ महामंत्री एवं तत्कालीन कुलसचिव के सम्बन्ध में दिनांक 20जून 2025 को कर्मचारी व्हाट्सप्प ग्रुप पर की गई टिप्पणी पर कार्यवाही किये जाने हेतु किये गये अनुरोध पर, सम्यक् विचारोपरान्त कुलपति द्वारा जाँच समिति के गठन स्वीकृति प्रदान की है। कमेटी में प्रो0 आनन्द विश्वकर्मा, निदेशक, विधिक, लविवि, प्रो० एच०एन० प्रसाद, अंग्रेजी विभाग और हरि ओम कुमार, सहायक कुलसचिव शामिल किए गए हैं माना जा रहा है कि अभी यह मामला और आगे फुल पकड़ेगा क्योंकि 12 दिन बीतने के बाद भी लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में यह मामला पूरी तरह से चर्चा का विषय बना हुआ है लोग इस मामले में विद्यानंद त्रिपाठी से माफी मांगने की मांग कर रहे हैं कई शिक्षकों ने अपना नाम न छापने के साथ पर कहा कि विद्यानंद त्रिपाठी जब रजिस्टर के पद पर कार्यवाहक रूप से बैठे हुए थे तब वह शिक्षकों के साथ बहुत ही बदतमीजी से बात करते थे और अभी भी परीक्षा नियंत्रक के दौरान भी उनका बिहेवियर शिक्षकों के प्रति अच्छा नहीं है।


