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ई-रिक्शा चलाने वाला एक बेटा, जिसने मेहनत से NEET क्लियर किया – सुहेल की कहानी हर युवा के लिए एक मिसाल


👀🙌❤️ ई-रिक्शा चलाने वाला एक बेटा, जिसने मेहनत से NEET क्लियर किया – सुहेल की कहानी हर युवा के लिए एक मिसाल

सुहेल की यह कहानी सिर्फ एक स्टूडेंट की नहीं, बल्कि जिद, मेहनत और सपनों को सच्चाई में बदलने वाले हौसले की कहानी है। एक ऐसे लड़के की जो दिन में ई-रिक्शा चलाता था और रात में डॉक्टर बनने के लिए पढ़ाई करता था।

सुहेल ने बताया कि दिनभर ई-रिक्शा चलाने के बाद भी वह थककर नहीं रुकता था। उसकी रातें किताबों के साथ बीतती थीं। अक्सर आधी रात तक या उससे भी आगे तक जागकर वह तैयारी करता था। उसने हर दिन अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए जंग लड़ी – बिना किसी शोर-शराबे के।

👉 NEET रैंक 11,000:
सुहेल ने बताया कि उसकी NEET रैंक 11,000 आई है। भले ही यह रैंक देश के टॉप मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पाने के लिए न हो, लेकिन यह एक मजबूत रैंक है जो उसे सरकारी सीट दिला सकती है। और यही बात सबसे बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है।

👉 संघर्ष में छिपी प्रेरणा:
इस कहानी की सबसे खास बात यह है कि सुहेल ने कभी अपने हालात को बहाना नहीं बनाया। गरीबी, जिम्मेदारियाँ, समय की कमी – इन सबसे लड़ते हुए उसने दिखा दिया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो मंज़िल जरूर मिल

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