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स्वर्गीयठाकुर हुकुम सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैसरगंज बना अराजकता का अड्डा, अधीक्षक की मनमानी से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था, डॉक्टर नदारद, मरीज बेहाल

स्वर्गीयठाकुर हुकुम सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैसरगंज बना अराजकता का अड्डा, अधीक्षक की मनमानी से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था, डॉक्टर नदारद, मरीज बेहाल

बहराइच। कैसरगंज तहसील क्षेत्र के ठाकुर हुकुम सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत दिन-ब-दिन बदहाल होती जा रही है। यहां नियुक्त अधीक्षक डॉ. एन.के. सिंह की लापरवाही और सत्ता-प्रशासन की सरंक्षणशील चुप्पी अब जानलेवा साबित होने लगी है। प्राथमिक चिकित्सा जैसी बुनियादी सेवाएं भी मरीजों को समय से नहीं मिल पा रही हैं। योगी सरकार की “स्वस्थ उत्तर प्रदेश” योजना की जमीनी हकीकत जानने जब पत्रकार सुनील कुमार गुप्ता ने मौके पर निरीक्षण किया, तो जो दृश्य सामने आया वह स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर करारा तमाचा था।

ओपीडी संख्या 14 में तैनात डॉक्टर मसूद आलम की कुर्सी घंटों खाली मिली। मरीज कतार में इंतजार करते दिखे लेकिन देखने वाला कोई नहीं था। मीडिया के कैमरे के सामने आने से मरीजों ने डर के कारण इनकार कर दिया, जो यह दर्शाता है कि अस्पताल के भीतर अघोषित डर और उपेक्षा का माहौल पनप चुका है।

हद तो तब हो गई जब पता चला कि अधीक्षक डॉ. एन.के. सिंह बीते कई वर्षों से इसी पद पर जमे हुए हैं, मानो उन्होंने पद को अपनी बपौती समझ लिया हो। अंदरखाने की चर्चाओं के अनुसार वे रिटायरमेंट तक यहीं से सेवा निवृत्त होंगे – और इस बीच सरकारी संसाधनों का हाल बेहाल होता रहेगा।

ग्राम पंचायत मत्रैपुर के निवासी व भाजपा सेक्टर प्रभारी कैलाश ने बताया कि वे अपने इलाज हेतु डॉक्टर मसूद आलम को दिखाने आए थे, लेकिन ओपीडी में डॉक्टर का दूर-दूर तक अता-पता नहीं था। उन्होंने खुलकर कहा कि यह कोई पहला मौका नहीं है, यहां डॉक्टरों की अनुपस्थिति आम बात बन चुकी है। इलाज के नाम पर बस दिखावा किया जा रहा है, असल में मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों की जेबें भरनी पड़ती हैं।

स्थानीय जनता का आरोप है कि अधीक्षक की मनमानी और खुद के आवास पर प्लास्टर बांधकर मनमानी पैसे लिए जाते हैं स्टोर की दवा भी बिक्री किया जाता है जिससे जनता त्रस्त हो चुकी है हड्डी के तौर पर ऑपरेशन के मरीज स्वयं अपनी गाड़ी से खुद के हॉस्पिटल बनवाए बंजारी मोड़ बहराइच में भेज कर वहां डॉक्टर एनके सिंह द्वारा मनमानी पैसा वसूला जाता है इस के पीछे स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों की शह है, जिसके चलते किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं होती। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या जिले का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह बेलगाम हो चुका है?

सरकारी योजनाओं और जनकल्याण के दावों को ठेंगा दिखाते हुए यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक लापरवाही, भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता का अड्डा बन चुका है।

अब देखना यह है कि क्या योगीराज में जिम्मेदार अधिकारी आंखें खोलेंगे या फिर इस खबर को भी पहले की तरह ‘ठंडे बस्ते’ की फाइलों में दफ्न कर देंगे।

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