
पुलिस अपने दिए पास को नहीं मानती
वीआईपी ड्यूटी में मस्त जनता त्रस्त
संवाददाता आलोक तिवारी
एकादशी पर वृंदावन की परिक्रमा में हजारों श्रद्धालु आस्था के साथ पैदल चल रहे हैं… लेकिन स्थानीय लोगों की जिंदगी प्रशासन ने मानो बंधक बना दी है।
स्थानीय लोगों को खुद अपनी गाड़ी निकालने में 2 से 3 घंटे लग रहे हैं पुलिस का साफ कहना कोई स्थानीय पास मान्य नहीं होगा…”
लेकिन सवाल यह है कि जब स्थानीय लोगों को रोका जा रहा है तो फिर परिक्रमा मार्ग में बाहर की गाड़ियां, रेत का ट्रक और श्रद्धालुओं की गाड़ियां आखिर कैसे घूम रही हैं?
क्या नियम सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए हैं?
क्या वृंदावन के निवासी दूसरे दर्जे के नागरिक हैं?
आस्था के नाम पर अव्यवस्था, भेदभाव और मनमानी आखिर कब तक चलेगी?
प्रशासन बताए —
स्थानीय जनता परेशान क्यों?
पुलिस द्वारा स्थानीय जनता को जारी किए गए पास व्यवस्था मजाक क्यों बनी हुई है?
और वीआईपी व बाहरी वाहनों को छूट किस आधार पर?
वृंदावन कोई प्रयोगशाला नहीं है… यहां लोग रहते भी हैं।
व्यवस्था चाहिए, उत्पीड़न नहीं।


