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विधायिका न्यायपालिका कार्यपालिका से गरिमा बनाए रखने हेतु सद्बुद्धि यज्ञ।


विधायिका न्यायपालिका कार्यपालिका से गरिमा बनाए रखने हेतु सद्बुद्धि यज्ञ। ईश्वर से वड़ा नहीं समझें गरिमा बनाए रखें क्षमा याचना करें अन्यथा युवा
आक़ोश से देश पर प़चंड संकट -” यश”
जनता का सच
स्टेट चीफ राधामोहन अग्रवाल
जयपुर,एक तरफ अमेरिका इजरायल
और ईरान के मध्य तनाव पूर्ण हालात से वैश्विक हाहाकार दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश की युवाओं पर छिछली अदूरदर्शिता पूर्ण टिप्पणी तथा कार्यपालिकीय अधिकारियों के तथा नेता मंत्रीओं के समाज और देश तोड़ने वाले वयानों से विप्लव विद्रोह का घड़ा भर रहा है। उक्त कथन वैदिक चिंतक ओउमाश्रय संस्थापक यशपाल यश ने ओउमाश्रय सेवा धाम में विधायिका न्यायपालिका कार्यपालिका से गरिमा बनाए रखने हेतु “सद्बुद्धि यज्ञ” के दौरान व्यक्त किए।यश ने वैदिक मंत्र का भावार्थ समझाते हुए कहा कि ईश्वर गुरूओं का गुरु राजाओं का राजा न्यायाधीशों का न्यायाधीश है।यश ने कहा कि किसी को अपने को ईश्वर से वड़ा नहीं समझते हुए गरिमा बनाए रखें गलत वयानी के क्षमा याचना करें इससे सभी का सम्मान सुरक्षित रहेगा।यश ने कहा कि” क्षमा वीरस्य भूषणम्”क्षमा से छोटे नहीं होते
अन्यथा युवा आक़ोश से देश पर प़चंड संकट की स्थिति और परिणामों की जिम्मेदारी और पाप अक्षम्य होगा।
संचालन सहयोगी भगवान दास गर्ग ने बताया कि इस अवसर पर पूर्व अधिशाषी अभियंता सतीश गुप्ता पूर्व व्याख्याता श्रीमति मंदाकिनी झारखंड से आए डी ए वी के शिक्षक सुशील आर्य कु स्वस्ति श्रीमति मधु रानी दीपांकर श्रीमति प्रियंका यश प़णव यश पिंटू भाई रमजान सहित अनेक गणमान्य मौजूद रहे

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