
गुंडा एक्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 1–2 केस से ‘गुंडा’ घोषित नहीं किया जा सकता
ने उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 के तहत कार्रवाई को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल एक या दो आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को ‘गुंडा’ (habitual offender) घोषित नहीं किया जा सकता।
क्या है मामला?
• याचिकाकर्ता सत्येन्द्र को बुलंदशहर प्रशासन ने
दो आपराधिक मामलों के आधार पर “आदतन अपराधी” बताते हुए
6 महीने के लिए जिला बदर (externment) करने का आदेश दिया
• इस आदेश को मेरठ मंडल के आयुक्त ने भी बरकरार रखा था
अदालत का विश्लेषण
न्यायमूर्ति संदीप जैन की सिंगल बेंच ने कहा—
“Habitual offender” साबित करने के लिए लगातार और श्रृंखलाबद्ध आपराधिक गतिविधियां दिखाना जरूरी है
अलग-थलग (isolated) घटनाओं से ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता
कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
• केवल 1–2 मामलों से किसी व्यक्ति को गुंडा घोषित करना
उसकी प्रतिष्ठा और सामाजिक सम्मान को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है
• यदि घटनाओं के बीच लंबा अंतर हो
“आदतन अपराधी” होने का आधार और कमजोर हो जाता है
अंतिम फैसला
हाईकोर्ट ने प्रशासन द्वारा की गई पूरी कार्रवाई को अवैध (illegal) करार देते हुए रद्द कर दिया
कानूनी महत्व
गुंडा एक्ट के दुरुपयोग पर महत्वपूर्ण रोक “Habitual offender” की परिभाषा को स्पष्ट किया
प्रशासनिक आदेशों में पर्याप्त और ठोस आधार की अनिवार्यता तय
Case Title: Satyendra v. State of U.P. & Ors. (Goonda Act Matter)
#Allahabad HighCourt #GoondaAct


