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अविश्वास प्रस्तावों का मकसद सिर्फ भारत की छवि खराब करना है।


अविश्वास प्रस्तावों का मकसद सिर्फ भारत की छवि खराब करना है।

मुख्य चुनाव आयुक्त के बाद पीएम मोदी के खिलाफ भी प्रस्ताव आएगा।

लोकसभा पर प्रतिदिन 9 करोड़ रुपए खर्च होते हैं।
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जनता का सच
स्टेट ब्युरो राधामोहन अग्रवाल
11 मार्च को लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ रखा गया विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया। आमतौर पर ऐसे प्रस्तावों पर जब वोटिंग होती है, लेकिन 11 मार्च को चर्चा के बाद विपक्ष ने वोटिंग की मांग नहीं रखी। फलस्वरूप सभापति जगदंबा पाल ने ध्वनिमत से अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने की घोषणा की। अब 12 मार्च को ओम बिरला ने अध्यक्ष के आसान पर बैठना शुरू कर दिया है। सवाल उठता है कि जब पिक्ष के पास सांसदों का संख्या बल ही नहीं है, तब अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाए जा रहे हैं। असल में विपक्ष का मकसद सिर्फ भारत की छवि को खराब करना है। विपक्ष नहीं चाहता कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की छवि मजबूत हो। विपक्ष यह दिखाना चाहता है कि मोदी अपने ही देश में कमजोर है। सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाए जा रहे है। अब जब लोकसभा अध्यक्ष बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया है, तब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू हो गई है। बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के अहम के कारण लाया गया तो ज्ञानेश कुमार के खिलाफ टीएमसी की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अहंकार की वजह से लाया जा रहा है। ज्ञानेश कुमार वाला प्रस्ताव भी जब खारिज हो जाएगा, तब प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में रखा जाएगा। कांग्रेस की अगुवाई में पहले ही संसद को चलने नहीं दिया जा रहा है और अब बार बार अविश्वास प्रस्ताव लाकर संसद में विधायी कार्यों में बाधा डाली जा रही है। लोकसभा का जब संचालन होता है, तब प्रति मिनट डेढ़ लाख रुपए खर्च होते हैं। प्रतिदिन 9 करोड़ रुपए खर्च हो जाते हैं। बिरला के खिलाफ रखे गए अविश्वास प्रस्ताव के कारण तीन दिन लोकसभा में विधायी कार्य नहीं हो सका। जो सांसद जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं वही सांसद जनता के पैसे की बर्बादी कर रहे हैं।

न बोलने देने की पोल खुली:
बिरला के खिलाफ रखे गए अविश्वास प्रस्ताव की बहस के दौरान कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जाता है। कांग्रेस के इस आरोपों का जवाब सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिया। शाह ने कहा कि विपक्ष के मुकाबले भाजपा गठबंधन के एनडीए के सदस्यों की संख्या ज्यादा है, लेकिन लोकसभा के आंकड़े बताते हैं कि सत्ता पक्ष से छह गुना ज्यादा समय विपक्ष को दिया गया है। जब विपक्ष के सांसद बोल सकते हैं तो फिर राहुल गांधी क्यों नहीं? शाह ने कहा कि जब संसद चलती है, तब राहुल गांधी विदेश यात्राओं पर होते है। शाह ने संसद सत्र और राहुल गांधी की विदेश यात्राओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। शाह ने कहा कि राहुल गांधी खदु बोलना नहीं चाहते और अपनी विफलताओं का ठीकरा लोकसभा अध्यक्ष पर फोडऩा चाहते हैं। शाह ने राहुल गांधी के आंख मटकाने जैसे व्यक्तिगत आचरणों का ब्यौरा भी प्रस्तुत किया। संसद में माइक बंद किए जाने के संबंध में शाह ने कहा कि यदि कोई सदस्य देश विरोधी बात करेगा तो उसका माइक बंद किया ही जाएगा। संसद देश की छवि खराब करने का मंच नहीं है। शाह ने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता का पद होने के कारण राहुल गांधी संसद में बोलने का विशेषाधिकार है। राहुल गांधी किसी भी विषय पर अपनी बात रख सकते हैं। संसद में जब मैं बोलता हूं और राहुल गांधी खड़े हो जाते हैं तो लोकसभाध्यक्ष मुझे बैठा देते हैं। मुझसे पहले राहुल गांधी को बोलने का मौका देते हैं, लेकिन राहुल गांधी तथ्यहीन बात रखते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष उन्हें टोकते हैं। संसद संविधान के नियमों के अंतर्गत चले इसकी जिम्मेदारी अध्यक्ष की है। शाह ने कहा कि ओम बिरला जैसे संवेदनशील, मृदुभाषी अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर घोर पाप किया है।

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