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अग्रसेन महाराज को कलियुग में पुरुषार्थ के देवता के रूप में पूजा जाएगा, यह वरदान महाभारत के युद्ध के बाद भगवान कृष्ण ने दिया था।


अग्रसेन महाराज को कलियुग में पुरुषार्थ के देवता के रूप में पूजा जाएगा, यह वरदान महाभारत के युद्ध के बाद भगवान कृष्ण ने दिया था।

श्री अग्र भागवत कथा के वाचक महामंडलेश्वर नर्मदा शंकरपुरी से एक मुलाकात।
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जनता का सच
स्टेट ब्युरो राधामोहन अग्रवाल
19 फरवरी को श्री अग्र भागवत कथा के सुप्रसिद्ध वाचक, ज्योतिषाचार्य और निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर नर्मदाशंकर पुरी एक दिवसीय प्रवास पर अजमेर आए, तभी उनसे मेरी मुलाकात हुई। उन्होंने कहा कि अग्रवाल समाज के हर युवा को महाराजा अग्रसेन के जीवन और पुरुषार्थ को समझना चाहिए। आज अग्रवाल समाज के हर व्यक्ति को पुरुषार्थी माना जाता है। यही वजह है कि समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रवालों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके पीछे भगवान कृष्ण का वरदान है। उन्होंने बताया कि महाराज के युद्ध के बाद जब सभी राजा और भगवान कृष्ण विमर्श कर रहे थे, तब 15 वर्षीय राजकुमार अग्रसेन की भी चर्चा हुई। भगवान कृष्ण को बताया गया कि 18 दिनों के युद्ध में 10वें दिन राजा वल्लभ सेन वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन उनके पुत्र अग्रसेन ने पांडवों की ओर से युद्ध को जारी रखा। 15 वर्ष की उम्र में अग्रसेन ने जो बहादुरी दिखाई, उसकी प्रशंसा तब भगवान कृष्ण ने भी की और तभी कृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में अग्रसेन को पुरुषार्थ के देवता के रूप में पूजा जाएगा। नर्मदाशंकर जी ने बताया कि महाभारत के युद्ध के बाद जब अग्रसेन अपने पिता के राज्य में पहुंचे तो गद्दी पर उनके चाचा कुंदसेन ने कब्जा कर लिया। अग्रसेन जो राज्य छोड़ कर गर्व ऋषि के आश्रम में शरण लेनी पड़ी, तब उन्होंने लक्ष्मी की मिट्टी की प्रतिमा बनाई और पूजा अर्चना शुरू की। धीरे धीरे अग्रोहा शहर (हरियाणा में) बसा है। उन्होंने कहा कि अग्रवाल समाज के युवाओं को इस बात का गर्व होना चाहिए कि महाराजा अग्रसेन के वंशज है। यूं तो वे महाभारत की भागवत कथा का वाचन भी करते हैं, लेकिन उन्हें श्री अग्र भागवत कथा का वाचन करने में एक अलग ही अनुभूति होती है। उन्हें इस बात का संतोष है कि अब अग्रवाल समाज की युवा पीढ़ी अपने पूर्वजों के बारे में जानने को उत्सुक हैं। यही वजह है कि पूरे देश में श्री अग्र भागवत कथा की मांग हो रही है। वह पिछले बीस वर्षों से अग्र भागवत कथा कर रहे हैं। नर्मदा शंकर जी ने बताया कि आज राजस्थान में खाटू श्याम जी का जो परचम है, उसके पीछे भी भगवान कृष्ण का वरदान है। महाभारत का युद्ध आरंभ होने के समय जब राजा बर्बरीक भी युद्ध के मैदान में जा रहे थे, तब उनकी मुलाकात भगवान कृष्ण से हुई। कृष्ण को पता था कि बर्बरीक कौरवों के पक्ष में युद्ध करेंगे। इसलिए कृष्ण ने बर्बरीक से उनका शीश मांग लिया। बर्बरीक ने एक क्षण में अपना शीश कृष्ण को दे दिया। तब भगवान कृष्ण ने वरदान दिया कि कलयुग में बर्बरीक को श्याम बाबा के नाम से जाना जाएगा। भगवान कृष्ण के वरदान के कारण ही आज पूरे देश में खाटू श्याम की प्रसिद्ध हो रही है। महाराज अग्रसेन जी की भागवत कथा के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 8209205133 पर नर्मदा शंकरपुरी जी से ली जा सकती है।

अजमेर में स्वागत:
19 फरवरी को अजमेर प्रवास के दौरान अग्रवाल समाज के प्रतिनिधि दीपचंद श्रीया, अशोक पंसारी, राजेंद्र मित्तल आदि ने नर्मदा शंकरपुरी का स्वागत किया। उन्होंने अजमेर प्रवास के दौरान वैशाली नगर स्थित तपस्वी भवन में हिंदू चालीसा तथा 386 अंकित ओम आकृति के भगवान सनातन ध्वज का विमोचन भी किया। इस अवसर पर सनातन धर्म रक्षा संघ अजयमेरु के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश अजय शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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