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कानपुर ने रचा इतिहास: 9 हजार युवाओं ने साइबर क्राइम, डिजिटल अरेस्ट और नशे के खिलाफ ली सामूहिक शपथ

कानपुर ने रचा इतिहास: 9 हजार युवाओं ने साइबर क्राइम, डिजिटल अरेस्ट और नशे के खिलाफ ली सामूहिक शपथ

डर से नहीं, समझ से फैसले लेंगे युवा: 9 हजार युवाओं को एडीजी ने दिलाई शपथ

मोबाइल से होने वाले अपराधों के खिलाफ नौ हजार युवाओं का संकल्प, लाजपत भवन में दिखी नई पीढ़ी की ताकत
*विराट कोहली–प्रियंका चोपड़ा के डीप फेक बने वीडियो दिखाकर किया सतर्क*

कानपुर:

स्वामी विवेकानंद की जयंती पर कानपुर में सोमवार को स्वामी विवेकानंद युवा समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में नई चेतना का संदेश दिया गया। लाजपत भवन, मोतीझील में आयोजित “युग चेतना–2026: सजग सोच, सुरक्षित भविष्य” कार्यक्रम में कानपुर शहर और देहात के करीब नौ हजार से अधिक युवाओं ने एक साथ साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी और नशे से दूर रहने की सामूहिक शपथ ली।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कानपुर जोन के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) आलोक सिंह ने युवाओं को शपथ दिलाई। हजारों युवाओं ने एक स्वर में कहा कि वे फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट, साइबर ठगी और नशे के झांसे में नहीं आएंगे।
एडीजी आलोक सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि साइबर अपराध से लड़ने के लिए सबसे बड़ा हथियार जागरूकता और अनुशासन है। उन्होंने युवाओं को नशे के खतरों से आगाह करते हुए कहा कि ड्रग्स को सॉफ्ट या हार्ड कहना एक भ्रम है। ड्रग्स सिर्फ ड्रग्स है और इसका अंत सिर्फ बर्बादी है। पंजाब इसका बड़ा उदाहरण है। एडीजी ने युवाओं से नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने की अपील की। उन्होंने बताया कि भारत में 1.60 लाख से अधिक नए स्टार्टअप शुरू हो चुके हैं और देश तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

*1930 पर सूचना दें, पूरा सिस्टम हो जाता है एक्टिव*

एडीजी आलोक सिंह ने साइबर अपराध से निपटने के व्यावहारिक उपाय भी बताए। उन्होंने कहा कि अगर साइबर ठगी होती है, तो तुरंत 1930 पर सूचना दें। एक कॉल से पूरा सिस्टम सक्रिय हो जाता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे डिजिटल अरेस्ट जैसे नए फ्रॉड से अपने परिवार और परिचितों को भी बचाएं। उन्होंने कहा कि भारत का कानून कभी फोन पर गिरफ्तारी नहीं करता। अगर कोई ऐसा कहता है, तो वह ठग है।”

*पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल बोले – अपनी पहचान पहचानिए*

कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को आज के संदर्भ में रखते हुए कहा कि युवाओं को सबसे पहले अपनी पहचान समझनी होगी। स्वामी विवेकानंद ने तर्क के माध्यम से जानने का मार्ग दिखाया। युवा भ्रमित न हों, अपनी कमजोरी पहचानें और उसे दूर करें। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली ताकत है।

*नुक्कड़ नाटक से दिया गया सशक्त संदेश*

कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट और नशे के दुष्परिणामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक में दिखाया गया कि कैसे पढ़ा-लिखा युवा भी डर और लालच में आकर ठगों का शिकार हो जाता है। यह प्रस्तुति युवाओं के बीच चर्चा का विषय बनी और कई युवाओं ने मंच से जुड़े स्वयंसेवकों से जानकारी भी ली।

*रक्षित टंडन ने खोले साइबर अपराध के राज*

प्रसिद्ध साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रक्षित टंडन ने युवाओं को तकनीकी और व्यवहारिक दोनों स्तर पर जागरूक किया। उन्होंने बताया कि कैसे फर्जी कॉल, नकली सिम, फर्जी लिंक और सोशल मीडिया ट्रैप के जरिए युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। रक्षित टंडन ने कहा कि साइबर अपराधी आपकी तकनीक से नहीं, आपकी भावनाओं से खेलते हैं। डर, लालच और जल्दबाजी—यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखें और खुलकर संवाद करें।

स्वामी विवेकानंद युवा चेतना समिति के अध्यक्ष विकास सिंह भोले ने कार्यक्रम का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको। लेकिन सवाल यह है कि अगर युवा गलत दिशा में उठे तो क्या होगा ? इसलिए युग चेतना का आयोजन किया गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नशे पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था चरित्र ही असली शक्ति है। नशा सबसे पहले चरित्र को मारता है। उन्होंने कहा कि कानपुर में कई उदाहरण सामने आए हैं पहले गुटखा, फिर नशा, फिर चोरी, फिर अपराध और अंत में बर्बाद जिंदगी।

*युवा चेतना में तीन बड़े संकल्प*

स्वामी विवेकानंद युवा समिति की ओर से तीन बड़े संकल्प सामने रखे गए। जिनमें हर युवा को साइबर जागरूकता, नशा मुक्त समाज के लिए निरंतर अभियान पुलिस और युवाओं के बीच विश्वास का सेतु बनाना है। उन्होंने कहा कि यह अभियान यहीं खत्म नहीं होगा, बल्कि स्कूलों, कॉलेजों और मोहल्लों तक जाएगा।

*विराट कोहली–प्रियंका चोपड़ा के फर्जी वीडियो दिखाकर किया सतर्क*

कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रक्षित टंडन ने युवाओं और अभिभावकों को डीप फेक तकनीक के खतरों से रूबरू कराया। उन्होंने मंच से विराट कोहली और प्रियंका चोपड़ा जैसे चर्चित क्रिकेटर और फिल्म स्टार के डीप फेक वीडियो दिखाए और बताया कि किस तरह साइबर ठग नामी हस्तियों की नकली वीडियो और आवाज बनाकर आम लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। रक्षित टंडन ने कहा कि आज अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर भरोसेमंद चेहरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जब सामने विराट कोहली या प्रियंका चोपड़ा जैसी हस्ती दिखाई देती है, तो लोग बिना जांच-पड़ताल के भरोसा कर लेते हैं और यहीं ठगी शुरू होती है। उन्होंने बताया कि डीप फेक वीडियो के जरिए निवेश, इनाम, क्रिप्टो करेंसी और सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है। कई मामलों में आवाज इतनी वास्तविक होती है कि पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है। रक्षित टंडन ने इससे बचाव के उपाय भी बताए। उन्होंने कहा कि किसी भी वीडियो, कॉल या मैसेज पर तुरंत विश्वास न करें, आधिकारिक स्रोत से जानकारी की पुष्टि करें और संदिग्ध लिंक या कॉल पर प्रतिक्रिया न दें। कोई भी सेलिब्रिटी या सरकारी संस्था कभी व्हाट्सएप कॉल या वीडियो के जरिए पैसे नहीं मांगती।
उन्होंने कहा कि जागरूकता ही डीप फेक के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार

*विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति*

कार्यक्रम में डीआईजी हरीश चंद्र, एसपी कानपुर देहात श्रद्धा नरेंद्र पांडेय, आईपीएस सुमित राम टेके, सांसद देवेंद्र सिंह भोले, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक श्रीराम जी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विभाग प्रचारक बैरिस्टर जी, क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल, जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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