
*निजी उर्वरक विक्रेताओं का धरना-प्रदर्शन, प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर लगाए भेदभाव के आरोप*
सिद्धार्थनगर।
जिले के निजी उर्वरक विक्रेताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली से नाराज होकर बुधवार को जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। उर्वरक विक्रेताओं ने कृषि भवन से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया।
प्रदर्शनकारी विक्रेताओं का आरोप है कि प्रशासन द्वारा केवल निजी उर्वरक विक्रेताओं की दुकानों की सघन जांच की जा रही है, जबकि सरकारी समितियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका कहना है कि सरकारी समितियों पर भी मानक से अधिक दर पर उर्वरक की बिक्री की जा रही है, इसके बावजूद वहां जांच नहीं की जाती।
विक्रेताओं ने बताया कि निजी दुकानदारों को यूरिया की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में उन्हें 300 रुपये प्रति बोरी तक यूरिया खरीदना पड़ता है, साथ ही अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों के पैकेट भी खरीदने पड़ते हैं। इस संबंध में कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
धरना दे रहे विक्रेताओं का यह भी आरोप है कि छोटी-छोटी कमियों के आधार पर उनकी दुकानों को निलंबित कर दिया जाता है, जबकि सरकारी समितियों पर इसी तरह की अनियमितताओं को नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने जिला कृषि अधिकारी पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा कि आए दिन अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है।
विक्रेताओं का कहना है कि कथित रूप से प्रति बोरी 30 रुपये की अवैध मांग की जाती है और मांग पूरी न होने पर छापेमारी की जाती है। साथ ही, अधिकारियों द्वारा दलालों के माध्यम से कार्रवाई किए जाने के भी आरोप लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि जिला कृषि अधिकारी जहां-जहां तैनात रहे हैं, वहां उनकी संपत्ति को लेकर चर्चाएं होती रही हैं।
उर्वरक विक्रेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
*महराजगंज से जिला संवाददाता मोहम्मद अली की खास रिपोर्ट*


