
*प्रदेश में जल प्रबन्धन का नया अध्याय होगा डूंगरी बांध*
*सवाई माधोपुर-करौली जिलों में 1 लाख 25 हजार हैक्टेयर नया सिंचित क्षेत्र विकसित होगा*
*डूंगरी बांध की पूर्व निर्धारित ऊंचाई को घटाकर 227.5 मीटर करने से जलभराव क्षेत्र सीमित हुआ*
जनता का सच
स्टेट ब्युरो राधामोहन अग्रवाल
सवाई माधोपुर, 24 नवम्बर।पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों में पेयजल और सिंचाई की बरसों पुरानी आवश्यकता को पूरा करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा संशोधित पार्बती-कालीसिंध-चम्बल (पीकेसी) लिंक परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित डूंगरी बांध निर्माण के विषय पर सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में राजस्थान वाटर ग्रिड कॉरपोरेशन के मुख्य महाप्रबंधक व मुख्य अभियंता राकेश कुमार गुप्ता ने विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को परियोजना के तकनीकी पहलुओं, लाभों और प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास से जुड़े प्रावधानों के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया।
गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार के साथ एमओयू कर पूर्वी राजस्थान को जल-आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सवाई माधोपुर करौली जिले के किसानों की वर्षों पुरानी मांग वर्तमान सरकार पूरा करने जा रही हैं । संशोधित पीकेसी लिंक परियोजना में डूंगरी बांध से पूर्व में तैयार की गई इंदिरा लिफ्ट योजना व पीपल्दा लिफ्ट सिंचाई योजना में प्रस्तावित क्षेत्र भी लाभान्वित होंगा। उन्होंने कहा कि डूंगरी बांध की पूर्व निर्धारित ऊंचाई 230 मीटर को घटाकर अब 227.5 मीटर कर दिया गया है, जिससे जलभराव क्षेत्र सीमित हुआ है। परियोजना के तहत मोरेल और बनास नदी पर प्रस्तावित डूंगरी बांध से सवाई माधोपुर एवं करौली जिलों की 1.25 लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित होगी तथा दोनों जिलों को पेयजल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, उद्योग-धंधों, पर्यटन और स्थानीय रोजगार में भारी वृद्धि होगी।
*सवाई माधोपुर में सिर्फ 10 गांवों की आबादी होगी प्रभावित, गलत प्रचार से दूर रहें* :- मुख्य अभियंता गुप्ता ने स्पष्ट किया कि डूंगरी बांध के बनने से केवल 16 गांवों का आबादी क्षेत्र ही प्रभावित होगा, जिनमें सवाई माधोपुर जिले के मात्र 10 गांवों का आबादी क्षेत्र ही शामिल हैं। यह अधिकांश क्षेत्र पहले से मोरेल और बनास नदी की बाढ़ से नियमित रूप से प्रभावित होता रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा 76 गांवों के प्रभावित होने का भ्रम फैलाया जा रहा है। मुख्य अभियंता के अनुसार, डूंगरी बांध परियोजना में सवाई माधोपुर-करौली जिलों में 10 से 75 प्रतिशत प्रभावित संभावित आबादी क्षेत्र में सवाई माधोपुर के बाड़ोलास, डूंगरी, सामोली, सांकड़ा 4 गांव और 75 प्रतिशत से अधिक संभावित आबादी क्षेत्र में बाढ़ बिलोली, बिलोली नदी, भूरी पहाड़ी, तालेड़ा, भावपुर एवं खिदरपुर जादौन 6 गांव शामिल हैं।
*प्रदेश के 17 जिलों और 40 प्रतिशत आबादी को मिलेगा लाभ* :- गुप्ता के अनुसार, संशोधित पीकेसी लिंक परियोजना से कुल 2 लाख 51 हजार हैक्टेयर नवीन सिंचाई क्षेत्र सृजित होंगे और 1 लाख 52 हजार हैक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का पुनर्स्थापन होगा। करौली जिले में 71 हजार 775 हैक्टेयर एवं सवाई माधोपुर 53 हजार 225 हैक्टेयर क्षेत्र में नए सिंचित क्षेत्र विकसित होंगे। इस प्रकार दोनों जिलों में कुल 1 लाख 25 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में नवीन सिंचित क्षेत्र विकसित होंगे। साथ ही, 33 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र का पुनर्स्थापन भी संभव होगा। परियोजना लागू होने पर प्रदेश के सवाई माधोपुर-करौली सहित 17 जिलों और लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या को पेयजल और औद्योगिक जल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
*अधिकांश जलभराव बनास और मोरेल नदियों के जल बहाव क्षेत्र में रहेगा, प्रशासन ने की अपील “सही जानकारी लें, भ्रम से बचें* ” :- जिला कलक्टर काना राम ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आमजन को परियोजना के तथ्य स्पष्ट रूप से समझाएं, ताकि किसी प्रकार का भ्रम या गलत धारणा न फैल सके। डूब क्षेत्र के अधिकतर गांव पूर्व में भी प्राकृतिक जलभराव से प्रभावित होते रहे हैं, ऐसे में डूंगरी बांध उनका स्थायी समाधान बनेगा और बाढ़ नियंत्रण में भी सहायक सिद्ध होगा।
काना राम ने कहा कि राज्य सरकार जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और किसी भी प्रकार के विस्थापन के संबंध में पारदर्शी एवं मानव-केन्द्रित नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि मंत्री महोदय द्वारा भी स्पष्ट किया जा चुका है कि “अधिक गांवों के विस्थापन” संबंधी दावे असत्य और तथ्यों से परे हैं।
जिला प्रशासन ने पुनः आमजन से अपील की है कि वे अफवाहों से दूर रहें और किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए जल संसाधन विभाग से तथ्यात्मक विवरण प्राप्त करें।


