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मृतक की अस्थि संचय के वाद कोई दायित्व नहीं रहता ओउमाश्रय सेवा धाम में आचार्य रविशंकर का शंका समाधान। भिखारी रहित जयपुर और इनके वच्ची को गुरुकुलीय अनुशासन में माडर्न एजूकेशन पर हुआ मंथन।


मृतक की अस्थि संचय के वाद कोई दायित्व नहीं रहता ओउमाश्रय सेवा धाम में आचार्य रविशंकर का शंका समाधान।
भिखारी रहित जयपुर और इनके वच्ची को गुरुकुलीय अनुशासन में माडर्न एजूकेशन पर हुआ मंथन।
जनता का सच
स्टेट ब्युरो राधामोहन अग्रवाल
जयपुर, सरकारी इंजीनियरिंग नौकरी छोड़ वेद दर्शन उपनिषदों के विद्वान आचार्य रवि शंकर आर्य ने निराश्रित जन सेवार्थ ओउमाश्रय सेवा धाम में आध्यात्मिक सामाजिक विंदुओं पर शंका समाधान सत्र में जिज्ञासुओं की जिज्ञासा शांत की।
ओउमाश्रय संस्थापक यशपाल यश ने अनुसार आर्य ने बताया कि मृतक की अन्त्येष्टि तथा तीसरे दिन चिता शांत होने पर अस्थि और भस्म को खेतों उद्यानों में डालना या वहते जल में प्रवाहित करना ही अन्तिम दायित्व है।
सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमति सीमा गोयल द्वारा मृत्यू या वृह्म भोज दान पुण्य करने के प्रश्न पर कहा कि भोज अनुचित है क्योंकि जीवात्मा शरीर छोड़ते ही ईश्वर की न्याय व्यवस्थानुसार दूसरा स्थान मोक्ष या अन्य मनुष्य या अन्य यौनि के शरीर में चली जाती है।दान पुण्य तो सेवा कार्यों में करना चाहिए किन्तु इससे मृतक को कोई लाभ नहीं होता वरन् परिजनों का कल्याण होगा।
इस अवसर पर जयपुर जिला आर्य वीर दल संचालक सुभाष आर्य भी मौजूद रहे संचालक देवेश गोयल ने सभी को भगवा दुपट्टा ओढ़ाकर कर स्वागत किया।
यश ने बताया कि ओउमाश्रय के भिखारी रहित जयपुर और इनके बच्चों को गुरुकुलीय अनुशासन में माडर्न एजूकेशन विजन पर कार्य योजना तैयार करने चर्चा हुई।
यश ने बताया कि भिखारियों को लघु-कुटीर गृह उद्योग में नियोजित करने के संकल्प को क्रियान्वित करने की दिशा में कार्य चल रहा है।

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