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फर्रुखाबाद रेल दोहरीकरण: DPR के लिए ₹5.82 करोड़ मंजूर!


फर्रुखाबाद रेल दोहरीकरण: DPR के लिए ₹5.82 करोड़ मंजूर!
कानपुर-फर्रुखाबाद-कासगंज रेलखंड पर लंबे समय से प्रतीक्षित दोहरीकरण परियोजना को बड़ी सौगात मिली है।

रेलवे बोर्ड ने 242.84 किमी लंबी इस महत्वपूर्ण लाइन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की स्वीकृति दे दी है।

💰 मुख्य बिंदु:
परियोजना का नाम: कानपुर अनवरगंज – फर्रुखाबाद – कासगंज रेल लाइन दोहरीकरण।

दूरी: लगभग 242.84 किमी।

मंजूरी: रेल मंत्रालय से पहले ही मिल चुकी है।

DPR के लिए स्वीकृति: रेलवे बोर्ड ने इसकी DPR तैयार करने के लिए ₹5.82 करोड़ का बजट भी मंजूर कर दिया है।

लाभ: दोहरीकरण से ट्रेनों की गति और समयबद्धता (punctuality) में सुधार होगा, जिससे यात्रा का समय कम होगा और मालगाड़ियों की आवाजाही भी सुगम हो जाएगी।

⚠️ स्थानीय लोगों की चिंता:
इस विकास के बीच, फर्रुखाबाद और फतेहगढ़ के बीच रेलवे लाइन से सटे इलाकों के निवासियों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। DPR और निर्माण कार्य शुरू होने पर, दोहरीकरण के लिए जगह बनाने हेतु 200 से अधिक मकानों के प्रभावित/ध्वस्त होने की आशंका है। लोगों की नज़र अब रेलवे द्वारा प्रस्तावित मुआवज़े और पुनर्वास योजना पर टिकी है।

यह परियोजना फर्रुखाबाद, कन्नौज, एटा, कासगंज जैसे जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी देकर क्षेत्रीय विकास को नई गति देने की उम्मीद है।

फर्रुखाबाद के निवासियों के लिए एक बड़ी खबर है! लंबे समय से प्रतीक्षित कासगंज–फर्रुखाबाद–कानपुर अनवरगंज रेलवे लाइन के दोहरीकरण परियोजना को अब गति मिल गई है। रेलवे बोर्ड ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए DPR (Detailed Project Report) तैयार करने की स्वीकृति दे दी है।

✅ परियोजना को मिली मंजूरी
रेल मंत्रालय से पहले ही हरी झंडी पा चुकी इस परियोजना के लिए रेलवे बोर्ड ने 7 नवंबर को पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक, गोरखपुर को पत्र जारी कर आधिकारिक सूचना दे दी है। यह दोहरीकरण कार्य कानपुर अनवरगंज – फर्रुखाबाद – कासगंज के बीच, कुल 242.84 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन पर प्रस्तावित है, जो इस रूट पर रेल यातायात को सुगम और तेज बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

⚠️ ‘आशियाने’ पर संकट? 200 से अधिक घर खतरे में
विकास की इस खुशखबरी के साथ ही फर्रुखाबाद और फतेहगढ़ के बीच रेलवे लाइन से सटे इलाकों में रहने वाले सैकड़ों लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, दोहरीकरण के लिए ट्रैक के चौड़ीकरण की आवश्यकता होगी, जिसके कारण 200 से अधिक मकानों के ध्वस्त होने की संभावना है।

स्थानीय निवासियों में अब यह भय व्याप्त है कि यह परियोजना उनके वर्षों पुराने आशियानों को छीन सकती है। सभी की निगाहें अब DPR और अधिग्रहण की प्रक्रिया पर टिकी हैं कि रेलवे इस चुनौती का सामना किस तरह करती है और प्रभावित लोगों के लिए क्या पुनर्वास योजना लाती है।

यह परियोजना जहां एक तरफ क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन के लिए पुनर्वास और व्यवस्थापन की एक बड़ी चुनौती भी खड़ी कर रही है।

👉 नोट — फोटो AI द्वारा बनाया गया है यह केवल एक प्रतीकमात्र है इसको सत्य न समझे।

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