
ददरी मेला की परंपरा और धार्मिक महत्व के अनुसार भारतेंदु मंच का कार्यक्रम संत समागम के शुभ कार्यक्रम से प्रारंभ होता है। मान्यता अनुसार महर्षि भृगु के समय से ही विभिन्न संप्रदाय के संत,ऋषि, मुनि आदि धार्मिक गुरु के आध्यात्मिक प्रवचन और उपदेशों से सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ होता है।इस बार संत समागम में विभिन्न संप्रदाय के धार्मिक गुरु के साथ धर्मगुरु से उनके शिष्यों एवं अनुयायियों को प्रतिभाग करने के लिए आमंत्रित किया गया है। —
(१)वैदिक संप्रदाय
(२)स्वर्वेद-विहंगम योग संप्रदाय
(३)गायत्री संप्रदाय
(४)वैष्णव संप्रदाय
(५) शैव संप्रदाय
(६)नाथ संप्रदाय
(७)शिवनारायणी संप्रदाय
(८)कबीर पंथ
(९)नानक संप्रदाय
(१०)रैदासिया संप्रदाय
(११)ब्रह्माकुमारी संप्रदाय
(१२)उदासी संप्रदाय
(१३)यारी संप्रदाय,चितबड़ागांव
(१४)जैन संप्रदाय
(१५)बुद्ध संप्रदाय
पवित्र संत समागम में धर्म गुरु का समन्वय श्री शिव कुमार कौशिकेय होंगे,संत समागम ही ददरी मेला की सबसे प्रमुख विशेषता है।
—मुख्य राजस्व अधिकारी,बलिया


