
लोहिया अस्पताल मे फ्रिज गंदा और फर्श पर मिले मरीज, सवालों पर अटके कर्मी
कमल कांत दुबे जिला संवाददाता फर्रुखाबाद
फर्रुखाबाद। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (इन्क्वास) की दो सदस्यीय केंद्रीय टीम ने शुक्रवार दोपहर लोहिया अस्पताल का निरीक्षण किया। टीम को एंटी रैबीज यूनिट का फ्रिज गंदा और हब कटर मानकविहीन मिला। आर्थो सर्जन के कमरे और प्लास्टर रूम में महिला मरीज के लिए पर्दा तक नहीं मिले। अधिकांश कर्मी सवालों के जवाब नहीं दे सके।
डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में केंद्रीय टीम में शामिल डॉ. अगोली गोरे और डॉ. नरेंद्र सिंगोहा सुबह करीब नौ बजे पहुंचे। उन्होंने सभागार में करीब दो घंटे तक डॉक्टरों और कर्मियों से वार्ता की। दोपहर 12 बजे दोनों अफसरों ने अलग-अलग निरीक्षण शुरू किया। डॉ. अगोली गोरे ने सेंट्रल लैब में करीब एक घंटे तक बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने ब्लड नमूना काउंटर से लेकर जांचों तक संबंधित कर्मियों से सवाल जवाब किए। कई सवालों के जवाब नहीं मिल सके
डॉ. नरेंद्र सिंगोहा ओपीडी में टीबी एवं चेस्ट फिजीशियन डॉ. अंकित मिश्रा के कमरे में पहुंचे। वहां लगी एक्सरे डिस्प्ले बंद मिली। उन्होंने कमरे में गर्मी होने की वजह जानी तो डॉक्टर ने एसी सही न होने की बात बताई। डॉ. नरेंद्र ने क्वालिटी मैनेजर रजा को दुरुस्त रखने को कहा। ड्रेसिंग रूम में गंदगी मिली। एंटी रैबीज रूम की फ्रिज का फ्रीजर गंदा मिला। वहां रखा हब कटर की जानकारी ली, तो कर्मियों ने बताया कि इसे रोजाना डस्टबिन में खाली कर देते हैं। डॉ. नरेंद्र ने इसे नियम विरुद्ध बताया। कई सवालों के जवाब ड्यूटी कर्मी नहीं दे सके। कहा कि करीब 20 लीटर का हब कटर मंगवाएं। भरने के बाद उसे सील करके हटवा दें और नया रखें।
टीम को बालरोग विशेषज्ञ के यहां लंबाई का बैमाना नहीं मिला। वजन करने वाली मशीन सामने रखने की बात कही। आर्थो सर्जन डॉ. रिषिकांत वर्मा से कई सवाल किए। उन्हें प्लास्टर रूम और डॉक्टर के कमरे में महिला मरीज के लिए पर्दा नहीं मिलीं। दवा वितरण कक्ष में टीम ने कहा कि जिस पर्ची से दवा दी जाती है, वह ठीक नहीं है। पूरे पर्चे की एक कॉपी होनी चाहिए। उन्होंने वितरण कक्ष में ही दवाएं डिस्प्ले करने को कहा। शाम चार बजे तक अधिकारी निरीक्षण करते रहे। उनके साथ डॉ. प्रभात वर्मा, फार्मासिस्ट हरश्याम सिंह आदि रहे।
ई-हॉस्पिटल चालू करके बने पहला अस्पताल
दवा वितरण की जानकारी के दौरान ई-हॉस्पिटल शुरू होने का काम चलना बताया गया। उन्होंने कहा कि ऐसा काम करके दिखाएं जो प्रदेश में न हुआ हो। दवा का वितरण ई-हॉस्पिटल सॉफ्टवेयर पर ही शुरू करें, तो पारदर्शिता बनी रहेगी।


