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आपणों खेत–आपणी खाद” अभियान से मृदा स्वास्थ्य संवर्धन को मिलेगा बढ़ावा जनता का सच स्टेट चीफ राधामोहन अग्रवाल, सवाई माधोपुरजलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा जिले में 6 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक “आपणों खेत–आपणी खाद” अभियान संचालित किया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग एवं जैविक खादों के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। संयुक्त निदेशक कृषि लखपत लाल मीणा ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर उन्हें अपने खेत पर ही जैविक खाद एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग हेतु प्रेरित करना है। इसके तहत ग्राम पंचायत स्तर पर कृषक गोष्ठियां, रात्रि चौपाल, प्रभात फेरी, स्लोगन गतिविधियां तथा विद्यालयों एवं स्थानीय संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कृषि अधिकारियों द्वारा किसानों को हरी खाद, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती एवं अन्य जैव उत्पादों के उपयोग की जानकारी दी जाएगी, जिससे न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी बल्कि कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।


आपणों खेत–आपणी खाद” अभियान से मृदा स्वास्थ्य संवर्धन को मिलेगा बढ़ावा
जनता का सच
स्टेट चीफ राधामोहन अग्रवाल,
सवाई माधोपुरजलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा जिले में 6 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक “आपणों खेत–आपणी खाद” अभियान संचालित किया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग एवं जैविक खादों के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा।
संयुक्त निदेशक कृषि लखपत लाल मीणा ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर उन्हें अपने खेत पर ही जैविक खाद एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग हेतु प्रेरित करना है। इसके तहत ग्राम पंचायत स्तर पर कृषक गोष्ठियां, रात्रि चौपाल, प्रभात फेरी, स्लोगन गतिविधियां तथा विद्यालयों एवं स्थानीय संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कृषि अधिकारियों द्वारा किसानों को हरी खाद, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती एवं अन्य जैव उत्पादों के उपयोग की जानकारी दी जाएगी, जिससे न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी बल्कि कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

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